Deepika Padukone Turns As A Relative Of Arjun and Sonam After Marrying Ranveer Singh

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

पूर्वांचल के डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या एक अबूझ पहेली बनती जा रही है। इस वारदात के जितने साक्ष्य सामने आ रहे हैं, उससे इसमें साजिश और संरक्षण दोनों दिखने लगे हैं। भले ही प्रदेश के पुलिस प्रमुख ओपी सिंह पुलिस की तत्परता की दलील दे रहे हैं लेकिन हकीकत में साक्ष्य इसमें पुलिस की भूमिका को संदिग्ध कर रहे हैं।

 

बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जो पहली तस्वीर जारी हुई, उसमें उसके सिर पर गोली लगी हुई थी। उसके बाद दूसरी तस्वीर सामने आई उसमें सिर व सीने दोनों स्थानों पर गोली लगने व खून के निशान थे। सवाल यह है कि क्या मुन्ना बजरंगी की मौत होने के बाद उसके सीने में गोलियां मारी गई। क्या इस हत्या की तस्वीर खींच रहा था। सिर्फ इतना ही नहीं, वारदात के बाद मुन्ना बजरंगी के अधिवक्ता ने मर्डर वेपन (पिस्टल) गटर में डाले जाने की आशंका जताई थी और मुस्तैद यूपी पुलिस ने घंटो मशक्कत के बाद वहीं से मर्डर वेपन बरामद भी कर लिया। ऐसे में यह हत्याकांड अब एक अबूझ पहेली बनता जा रहा है। जेल में जघन्य अपराधियों के एक साथ होने बावजूद सीसीटीवी न होना, बागपत जेल पहुंचने पर पुलिस कर्मियों के साथ मुन्ना बजरंगी का वीडियो ये सारी बातें एक दूसरे मेल नहीं खाती है।

सड़क ही नहीं जेल भी असुरक्षित

बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की नृशंस हत्या के बाद प्रदेश सरकार सवालों में है। सड़क से लेकर जेल असुरक्षित बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री घटना की जांच कर दोषियों को दंडित करने का दम भर रहे हैं लेकिन हकीकत इससे कहीं जुदा है। जेल में हए इस जघन्य हत्याकांड के बाद जेल के अंदर की तमाम व्यवस्थाएं तार –तार हो गईं है। परिवार वाले पहले से ही हत्या की साजिश करने की आशंका जता रहे थे और बागपत में सच साबित हो गई। जेल में पिस्तौल कैसे पहुंची, हत्या के बाद फोटो किसनें खींचे और ताबड़तोड़ फायरिंग के करीब बीस मिनट बाद अलार्म क्यों बजा, इसका जवाब फिलहाल अनुत्तरित है।

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