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जीएसटी की पाठशाला में कॉपी किताब व स्टेशनरी के व्यापारी

UP | Last Updated : Jun 20, 2017 11:48 AM IST

  • बेखौफ वसूले बस्ते  स्टेशनरी पर निर्धारित टैक्स
  • कलर पेंसिलगमस्टेशनरी के सामान 28 फीसद तक टैक्स दायरे में

   
stationary businessmen attend gst meeting to get answer to their questions

दि राइजिंग न्यूज़

लखनऊ।

एक जुलाई से प्रस्तावित गुड्स एंड सर्विस टैक्स के तहत कॉपी किताबस्टेशनरी कारोबारियों को हो रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए सोमवार को व्यापार भवन में कार्यशाला हुई। कार्यशाला में व्यापारियों की माल के परिवहन संबंधी दिक्कतों और टैक्स दर अधिक होने की समस्या का निस्तारण नहीं हो सका अलबत्ता उन्हें सरकार द्वारा प्रस्तावित दरों पर जनता से टैक्स वसूलने के नसीहत जरूर दी गई। हालांकि कार्यशाला में व्यापारियों का कहना था कि जीएसटी दरों की विसंगति के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित अभिभावक होंगे और उन्हें अनावश्यक महंगा सामान खरीदना होगा। यह किसी प्रकार उचित नहीं है। इस संबंध में व्यापारियों ने व्यापार कर आयुक्त मुकेश कुमार मेश्राम से भी वार्ता की और उन्होंने व्यापारियों की दिक्कतों को जायज मानते हुए उनकी मांग को जीएसटी काउंसिल तक पहुंचाने का भरोसा भी दिलाया।

लखनऊ व्यापार मंडल के तत्वावधान में सोमवार को जीएसटी पर कार्यशाला का आयोजन किया गया था। लाटूश रोड स्थित व्यापार मंडल भवन में आयोजित कार्यशाला में लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा ने व्यापारियों की दिक्कत को रखा। कार्यशाला में मौजूद वाणिज्य कर विभाग उप आय़ुक्त अजय श्रीवास्तव तथा मास्टर ट्रेनर एसपी सिंह ने व्यापारियों की समस्याओं को सुना। कार्यशाला में व्यापारियों ने विभाग से बिलिंग साफ्टवेयर उपलब्ध कराने की भी मांग रखीं। व्यापारियों का कहना है कि जो बिलिंग साफ्टवेयर वे लोग इस्तेमाल कर रहे थे, उनकी कीमत बहुत बढ़ गई है और छोटे व्यापारियों के लिए उन्हें खरीदना मुश्किल है।


नहीं दूर हुई समस्या

कार्यशाला के दौरान सबसे मुख्य समस्या दूसरे राज्य से माल मंगाने की प्रक्रिया ही रहा। इसका उत्तर भी नहीं मिल पाया। कार्यशाला में मौजूद अधिकारियों ने भी परिवहन बिल की बावत दो दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाने का आश्वासन दिया। इसी तरह से स्टेशनरी के विभिन्न उत्पादों पर भी अलगअलग दरों को लेकर व्यापारियों ने आक्रोश जाहिर किया। व्यापारियों का तर्क था कि कॉपी किताबस्टेशनरी अत्यावश्यक वस्तुओं की तरह से हैं। हर घर में बच्चे होते हैं और उनकी पढ़ाई में इनका इस्तेमाल होता है। अब इन पर टैक्स इतना ज्यादा होगा तो फिर अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ेगा ही। कार्यशाला में जितेंद्र चौहान, गौरव माहेश्वरी, विशाल गौड़, किशोर चड्ढा, नीटू भाई सहित बड़ी संख्या में स्टेशनरी पेपर कारोबारी उपस्थित थे।


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