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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

 

ओवरलोडिंग कर फर्राटा भरने वाले डंफर, टैंकर और स्कूली बच्चों को लेकर चलने वाले वाहनों की लगाम पर परिवहन विभाग ने लगाम लगा दी है। अब इन वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य होगा और इनकी अधिकतम गति साठ किमी प्रति घंटा ही होगी। इस संबंध में परिवहन आयुक्त पी गुरुप्रसाद ने आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन आदेशों के साथ ही अब वाहनों के फिटनेस के वक्त स्पीड गवर्नर की भी जांच की जाएगी।

 

दरअसल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के आदेश फरवरी 2017 में उच्चतम न्यायालय ने दिए थे। बावजूद इसके विभिन्न तकनीकी व विभागीय कारणों से इसे अब लागू किया जा सका। पिछले यूपी कैबिनेट की बैठक में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। अब वर्ष 2015 से पूर्व के सवारी चौपहिया वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य होगा। इसके लिए विभाग ने स्पीड गवर्नर के लिए मानक भी निर्धारित कर दिए हैं। डीलरों की नियुक्त भी एक माह में कर दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही वाहनों की फिटनेस के वक्त अब स्पीड गवर्नर भी जांच की जाएगी।

इन वाहनों को रखा गया है बाहर

दोपहिया वाहन, तिपहिया वाहन, चौपहिया साइकिल, अग्निशमन वाहन, पुलिस वाहन, एंबुलेंस और अस्सी किमी प्रति घंटा से कम रफ्तार वाले वाहनों के लिए स्पीड गवर्नर अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा सभी तरह के वाहनों में स्पीड गवर्नर को अनिवार्य कर दिया गया है।

 

ताकि न हो सकें घालमेल

स्पीड गवर्नर को लगाने में किसी तरह की अनियमित्ता न होने पाएं, इसके लिए परिवहन विभाग ने इसके स्पेसीफिकेशन भी तय कर दिए हैं। गति नियंत्रक उपकरण पर निर्माता का नाम, अधिकृत डीलर का नाम, गति नियंत्रक की यूनिक आईडी, वाहन क्रमांक, वाहन का माडल, गति नियंत्रक फिटमेंट की तारीख और गति नियंत्रक में फीड की गई गति सीमा अंकित किया जाना अनिवार्य होगा। इसका सत्यापन फिटनेस के वक्त परिवहन अधिकारी को करना होगा। इसकी रिपोर्ट प्रत्येक महीने परिवहन आयुक्त कार्यालय को दी जाएगी।

 

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