Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपना परचम लहराने वाले सपा के युवा नेता अखिलेश यादव का आज 45 वां जन्मदिन है। अखिलेश की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कठिन समय में भी कभी अपना संयम नहीं खोया।

सपा अध्‍यक्ष के जन्‍मदिन के मौके पर उनकी पत्‍नी डिंपल यादव ने शायराना अंदाज में दो ट्वीट कर उन्‍हें जन्‍मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने पहले ट्वीट में लिखा-

यह स्वच्छ राजनीति और विकास की अलग धारा है।

आपका व्यक्तित्व, हमें सबसे प्यारा है।

आप की मुस्कानों से आपका दुश्मन भी हारा है,

हर खुशियां मिलें, ये दुआ हमारा है।

 

 

वहीं, दूसरे ट्वीट में लिखा-

राष्ट्रगौरव, युवा हृदय सम्राट, उत्तर प्रदेश को प्रगति और खुशहाली की नई दशा और दिशा देने वाले, हर दिल अजीज, माननीय श्री @yadavakhilesh जी को 45 वें जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां व शुभकामनाएं।

अखिलेश यादव के जन्‍मदिन पर पढ़िए उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें-

  • अखिलेश यादव मीडिया में तो अपनी राजनीति को लेकर चर्चा में बने रहते हैं, लेकिन वे अपने व्यक्तिगत जीवन को सभी के सामने लाना पसंद नहीं करते। इसका पता उनके सोशल मीडिया अकाउन्ट से लगाया जा सकता है।

  • पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राजनीतिक जीवन के अलावा भी अपने परिवार को भी पूरा समय देते हैं। वे अपने बच्चों के लिए बेस्ट पापा हैं।

  • टीपू (अखिलेश) जब छोटे थे तभी उनकी मां का देहान्त हो गया था, बचपन में ही मां का साया सर से उठ जाने की वजह से चाचा शिवपाल सिंह यादव और उनके परिवार ने ही टीपू का खयाल रखा। इटावा के सेंट मैरी स्कूल में कई बार चाचा की साइकिल पर बैठकर टीपू स्कूल जाया करते थे। स्कूल में भी अखिलेश के गार्जियन उनके चाचा शिवपाल और चाची सरला ही थीं। हालांकि, मुख्यमंत्री बनने के बाद टीपू ने क्यों चाचा शिवपाल का खयाल रखना बंद कर दिया, यह सियासी कहानी का एक अलग पहलू है।

  • टीपू बचपन में काफी शर्मीले थे, लेकिन दिमागी रूप से वह काफी तेज थे। एक बार स्कूल में सांप होने की वजह से सभी बच्चे डर गए लेकिन टीपू ने पूरी हिम्मत के साथ उस सांप का सामना किया और डंडे से उसे मार दिया, इस घटना के बाद टीपू स्कूल में बच्चों के लिए हीरो बन गए थे।

  • अखिलेश के स्कूल की पढ़ाई राजस्थान के धौलपुर मिलिट्री स्कूल से हुई। चाचा शिवपाल ही उन्हें इटावा से वहां लेकर गए थे। स्कूल में दाखिले से जुड़ी सारी औपचारिकताएं चाचा शिवपाल ने ही पूरी की थीं क्योंकि मुलायम सिंह अपनी राजनीति में व्यस्त थे। स्कूल की पढ़ाई करने के बाद टीपू ने सिविल इनवायरमेंट इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।

  • बाद में वह सिडनी यूनिवर्सिटी से इनवायरमेंट इंजीनियरिंग में डिग्री लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए। सिडनी में पढ़ाई के दौरान उन्हें पॉप म्यूजिक का चस्का लगा। उन्हें किताबों और फिल्मों का भी शौक है। ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई जारी रहने तक उन्होंने अपनी पहचान छुपा कर रखी और किसी को नहीं बताया कि वह भारतीय राजनीति में नेताजी के नाम से प्रसिद्ध मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं।

  • अक्सर पढ़ाई के दौरान ही प्यार परवान चढ़ता है। टीपू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। अखिलेश को एक लड़की से पहली नजर में प्यार हो गया। ये लड़की कोई और नहीं बल्कि डिंपल यादव थीं। उस समय डिंपल यादव लखनऊ यूनिवर्सिटी में कॉमर्स की पढ़ाई कर रही थीं।

  • एक कॉमन फ्रेंड के जरिए टीपू और डिंपल की पहली मुलाकात हुई थी। दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे और शादी करना चाहते थे। डिंपल यादव के पिता एससी रावत लेफ्टिनेंट कर्नल थे, लेकिन टीपू के पिता मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते थे कि यह शादी हो।

  • वह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा से अखिलेश की शादी करवाना चाहते थे, लेकिन प्यार कहां किसी की परवाह करता है। अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह यादव को मनाने के लिए दादी को अपना जरिया बनाया।

  • टीपू ने दादी मूर्ति देवी को अपनी प्रेम कहानी सुनाई और कहा कि वह डिंपल से शादी करना चाहते हैं। आखिरकार टीपू की मेहनत रंग लाई और तमाम गतिरोधों के बावजूद 24 नवंबर, 1999 को डिंपल और अखिलेश की शादी हो गई।

  • कहा जाता है कि अखिलेश और डिंपल की शादी के लिए एक दौर में सपा के वफादार रहे अमर सिंह ने मुलायम सिंह को मनाया था। अखिलेश की जिद के सामने मुलायम को झुकना पड़ा, ये ठीक वैसे ही था जैसे बचपन में टीपू को पेड़ से नीचे उतारने के लिए सरला चाची को टॉफी देनी ही पड़ी थी।

  • “अखिलेश यादव- बदलाव की लहर” किताब की लेखिका सुनीत एरन ने लिखा है कि दोनों की पहली मुलाकात तब हुई थी जब अखिलेश 21 साल के थे और डिंपल 17 साल की थीं। डिंपल स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं, हालांकि दोनों तब एक दूसरे के साथ कभी नहीं रहे लेकिन डिस्टेंस रिलेशनशिप के दौरान दोनों ने एक-दूसरे को चार सालों तक डेट किया।

  • अखिलेश के सिडनी जाने के बाद भी दोनों लोग एक-दूसरे को लेटर लिखते रहे हालांकि आज की व्हाट्सऐप और फेसबुक वाली पीढ़ी इस दौर को करीने से नहीं समझ सकेगी। आज अखिलेश और डिंपल को एक आदर्श कपल माना जाता है। उनके दो बेटी और एक बेटा है। बेटियों का नाम अदिति और टीना है, जबकि बेटे का नाम अर्जुन है।

  • सुनीत ने अखिलेश के एक बयान को भी अपनी किताब में दर्शाया है जिसमें अखिलेश ने कहा, “अगर मैं राजनीतिक पिता का बेटा न होता तो फौजी होता।”

  • 10 मार्च 2012 को अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का नेता चुन लिया गया। 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी भारी बहुमत से जीती। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश ने अपने सबसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर अखिलेश यादव को बैठा दिया।

  • यूपी की 404 सीटों में से 224 जीत कर समाजवादी पार्टी सत्ता पर कबिज हो गई। 15 मार्च, 2012 को अखिलेश यादव ने 38 साल की उम्र में यूपी के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

  • हालांकि, चाचा शिवपाल नहीं चाहते थे कि अखिलेश मुख्यमंत्री बनें लेकिन किसी तरह उन्हें मनाकर अखिलेश को सत्ता सौंप दी गई। यह वह दौर था जब अखिलेश यादव टीपू से टीपू सुल्तान बन चुके थे।

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