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दि राइजिंग न्‍यूज

रामपुर।

 

लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने रामपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। इस बात का फैसला गुरुवार को सपा के चुनिंदा कार्यकर्ताओं की बैठक में लिया गया। कार्यकर्ताओं की राय से आजम खां ने पार्टी हाईकमान को अवगत करा दिया है।

क्‍या बोले आजम खां?

गुरुवार को सपा कार्यालय पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में आजम खां ने कहा कि रामपुर ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा है। सबका साथ-सबका विकास और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं का नारा देनी वाली सरकार ज्यादती कर रही है। पूरे रामपुर में आतंक का माहौल है। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने जुल्म की इंतहा कर दी है। बुधवार को रामपुर पब्लिक स्कूल (आरपीएस) के छोटे-छोटे बच्चे-बच्चियों का कान पकड़ कर खदेड़ दिया गया। ऐसे हालात में क्या करें। विरोध करने पर पुलिस मुकदमे दर्ज कर रही है। ऐसा सिर्फ भाजपा को चुनाव जिताने के लिए किया जा रहा है। ऐसे में पार्टी के सामने यह मुद्दा खड़ा है कि रामपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा जाए या नहीं। इस मुद्दे को लेकर पार्टी के चुनिंदा कार्यकर्ताओं की राय ली जा रही है।

इसके बाद आजम खां ने पार्टी के चुनिंदा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। बैठक में अधिकांश कार्यकर्ताओं ने राय दी कि रामपुर में जिला प्रशासन ने जो हालात पैदा कर दिए हैं, उसमें निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। ऐसे में चुनाव नहीं लड़ना ही ठीक होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं की राय से पार्टी हाईकमान को अवगत करा दिया गया है।

नुसरत बेगम सपा में शामिल

कांग्रेस नेत्री नुसरत बेगम गुरुवार को सपा में शामिल हो गईं। सपा कार्यालय पर आजम खां ने उनका स्वागत किया। कहा कि नुसरत कांग्रेस प्रदेश कार्य समिति की सदस्य थीं। उनका परिवार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ा हुआ था। वह कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर सपा से जुड़ गई हैं।

मसूद अजहर को कंधार कौन छोड़कर आया था

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाने के लिए चीन के वीटो के सवाल पर आजम खां ने कहा कि यह केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री की तो पाकिस्तान और चीन से बहुत दोस्ती रही है। बिना बुलावे के नवाज शरीफ के दस्तरख्वान पर खाना खाने पहुंच गए थे। चीन के राष्ट्रपति को झूला झुलाया था। मसूद अजहर को कंबड ले जाकर किसने छोड़ा था। कहा तो यह भी जाता है कि मसूद अजहर को छोड़ने के साथ-साथ उसे भारी-भरकम रकम भी दी गई थी।

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