FIR Registered Against Singer Abhijeet Bhattacharya For Misbehavior From Woman

दि राइजिंग न्‍यूज  

लखनऊ।

 

भारतीय जनता पार्टी को कैराना और नूरपुर उपचुनाव में पटखनी देने के लिए विपक्ष ने तैयारी कर ली है। कैराना और नूरपुर में होने वाले उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने अपने-अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। बीते शुक्रवार को अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की बैठक में आरएलडी और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर समझौते हुआ।

इसके बाद सोमवार (07 मई) को कैराना सीट पर आरएलडी ने अपनी प्रत्याशी पूर्व सांसद तबस्सुम हसन को तो नूरपुर सीट से सपा ने नईमुल हसन को चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की है।

दोनों के बीच हुआ था समझौता

सूत्रों के मुताबिक, चार मई को दोपहर के भोजन के बाद दोनों नेताओं के बीच करीब तीन घंटे बातचीत चली। इस मुलाकात में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच बीजेपी को चुनावी रण में रोकने की एकराय बनी। दोनों नेताओं ने आपस में बात करके अपने मतभेदों को दूर कर दोनों सीटों की दावेदारी तय कर दी थी।

कैराना लोकसभा और नूरपुर उपचुनाव को लेकर गठबंधन की जोड़तोड़ में कांग्रेस हाशिए पर है। स्थानीय नेता चुनाव लड़ने को उत्साहित नहीं हैं। इसलिए कांग्रेस ने पहले ही आरएलडी के उम्मीदवार को कैराना में समर्थन देने का ऐलान किया था।

कैराना लोकसभा का सियासी इतिहास

कैराना में बीजेपी के हुकुम सिंह के निधन के बाद ये सीट खाली हुई है। कैराना लोकसभा सीट 1962 में बनी। इस लोकसभा सीट पर पहली बार हुए चुनाव में निर्दलीय यशपाल सिंह ने विजयी पताका लहराया था। कांग्रेस और बीजेपी यहां से सिर्फ दो-दो बार ही चुनाव जीते हैं। 2014 से पहले इस सीट पर बीएसपी का कब्जा था। 1999 से 2004 तक ये सीट राष्ट्रीय लोकदल के खाते में थी।

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