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दि राइजिंग न्‍यूज

इलाहाबाद।

 

अपनी मांगो को पूरी करवाने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों से गैरहाजिर रहकर धरना-प्रदर्शन करने वाले शिक्षामित्रों पर और शिकंजा कस दिया गया है। परिषद सचिव ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक व बीएसए को निर्देश दिया है कि शिक्षामित्रों की स्कूलों में उपस्थिति जांचने के बाद उसी के अनुरूप मानदेय का भुगतान किया जाए और स्कूलों का नियमित निरीक्षण किया जाए।

 

 

शीर्ष कोर्ट ने बीते 25 जुलाई को प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था, उसके बाद से ही शिक्षामित्र प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद शिक्षामित्रों से कई बार वार्ता की और शासन का प्रतिनिधिमंडल भी कई दौर की वार्ता कर चुका है। पिछले दिनों उनका मानदेय बढ़ाने पर कैबिनेट मुहर लगा चुका है, लेकिन इससे शिक्षामित्र सहमत नहीं है। वह समान कार्य का समान वेतन देने की मांग पर अड़े हैं और लगातार आंदोलन प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

 

बीते आठ सितंबर को शिक्षा निदेशक बेसिक डॉ सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह सभी जिलों से शिक्षामित्रों की उपस्थिति मंगा रहे हैं। शासन के संज्ञान में आया है कि स्कूलों में केवल 60 फीसद शिक्षामित्र उपस्थित हो रहे हैं। अब परिषद सचिव संजय सिन्हा ने एडी बेसिक व बीएसए को शीर्ष कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए आदेश दिया है कि स्कूलों का नियमित निरीक्षण किया जाए।

 

 

उन्होंने स्कूलों में केवल 60 फीसद शिक्षामित्रों के उपस्थित होने पर असंतोष जताया है। साथ ही आदेश दिया है कि शिक्षामित्रों की उपस्थिति के आधार पर ही उन्हें मानदेय का भुगतान किया जाए। स्कूलों में अभिलेखों का रखरखाव करने और पठन-पाठन की नियमित सूचना परिषद मुख्यालय को भेजने को कहा गया है। 

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