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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव के बंगले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को अखिलेश यादव ने 4 विक्रमादित्य मार्ग स्थित सरकारी आवास की चाबी राज्य संपत्ति विभाग को सौंपी थी।

बंगले में हुई तोड़फोड़ की तस्वीरें मीडिया में आने के बाद अखिलेश यादव सरकार के निशाने पर हैं। अखिलेश यादव ने जहां सरकारी अधिकारियों पर बदनाम करने का आरोप लगाते हुए टूटफूट की लिस्ट देने की मांग की थी।

सीएम के आदेश पर हुई तोड़फोड़

रविवार को समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील साजन ने योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव को बदनाम करने के लिए अफसरों से बंगले में तोड़फोड़ करवाई गई।

सपा ने ये भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव द्वारा रात को सरकारी बंगले की चाबी सौंपने के बाद साजिश के तहत यहां तोड़फोड़ करवाई गई। ताकि, सुबह मीडिया को इसे दिखाया जा सके और अखिलेश यादव को बदनाम किया जा सके।

सुनील साजन के कहा, आखिर राज्य संपत्ति विभाग के बजाए सीएम के साथ रहने वाले लोग वहां क्यों गए? ये गोरखपुर और कैराना की हार का बदला लेने के लिए हताश होकर उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि हम स्वीकार करते हैं कि हमारी जो चीज थी उसे ले गए, लेकिन बिजली का स्विच बोर्ड उखाड़ना, तार निकलना और तहस नहस करने का काम हमने नहीं किया, बल्कि ये सब योगी सरकार की ओर से कराया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन

वहीं, सीएम योगी सरकार में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बंगले में हुई तोड़फोड़ को सुप्रीम कोर्ट का अवहेलना करार दिया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश पर खाली किए गए सरकारी आवास से एसी और टाइल्स को नहीं निकालना चाहिए था, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति है। अखिलेश यादव ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। इसकी जांच होनी चाहिए।

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