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दि राइजिंग न्यूज़

अभिषेक पाण्डेय

लखनऊ।

 

बीजेपी को ईवीएम बहुत पसंद है। लगता तो ऐसा ही है। जहां-जहां चुनाव ईवीएम मशीन से हुए वहां तो बंपर जीत दर्ज कराई है भाजपा ने, लेकिन बैलट पेपर वाले चुनाव पर भारतीय जनता पार्टी फुस्‍स ही हो गई।

 

उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। इन परिणामों में भारतीय जनता पार्टी की लहर बरकरार रही। परिणाम घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं बंपर जीत का दावा किया। यहां तक कि यूपी की गली-गली भगवा होने की चर्चा की जाने लगी लेकिन अगर नतीजों पर गौर किया जाये तो तस्वीर थोड़ी अलग है।

भाजपा को भायी ईवीएम लेकिन बैलट पेपर में हाथ रहा तंग  

 

नगर निगमों में बीजेपी ने अपना दबदबा जरूर बनाए रखा और 16 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज की है अपितु नगर पालिका वार्ड और नगर पंचायत वार्ड की बात की जाए तो परिणाम सूबे के सीएम की उम्मीदों पर पानी फिरा है। सूबे में नगर पालिका के 5261 वार्डों में चुनाव हुए, जिनमें से बीजेपी के सिर्फ 17% उम्मीदवार ही जीत पाए। जबकि 64.21% वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया।

 

इसका मतलब ये है कि ईवीएम ने तो भाजपा की लाज बचा ली लेकिन बैलट पेपर ने कलई खोल कर रख दी।

अब जरा नगर पंचायत पर गौर फरमाइए। नगर पंचायत की बात की जाए तो बीजेपी का प्रदर्शन यहां और भी कमजोर रहा। नगर पंचायत सदस्य के लिए 5446 वार्ड में चुनाव हुए और इनमें से 664 पर ही पार्टी के उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे। लिहाज़ा बीजेपी को नगर पंचायत के 12.22% वार्डों में जीत मिली।

 

अब इस बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि क्या सच में ईवीएम के साथ छेड़-छाड़ हुई है। क्योंकि मशीन से ज्यादा आज भी इन्सान का वजूद है। जहां हाथों-हाथ वोट पड़े वहां भारतीय जनता पार्टी फुस्स साबित हुई लेकिन जहां उंगली लगी-बटन दबा वहां भगवा परचम लहराया।     

ये है विजयी सीटों का प्रतिशत

 

नगर निगम पार्षद (कुल वार्ड-1300)

बीजेपी

596 (45.85%)

सपा

202 (15.54%)

बसपा

147 (11.31%)

कांग्रेस

110 (8.46%)

निर्दलीय या अन्य उम्मीदवार

245(17.23%)

 

 

नगर पालिका परिषद सदस्य (कुल वार्ड-5261)

निर्दलीय या अन्य उम्मीदवार

3442(64.21%)

बीजेपी

922 (17.51%)

सपा

477  (9.07%)

बसपा

262  (4.98%)

कांग्रेस

158 (2.98%)

 

नगर पंचायत सदस्य (कुल वार्ड-5446)

निर्दलीय या अन्य उम्मीदवार

3941(71.29%)

बीजेपी

664 (12.22%)

सपा

453 (8.34%)

बसपा

262 (4.01%)

कांग्रेस

126 (2.32%)

 

 

 

नगर निगम मेयर (कुल सीट-16)

बीजेपी

14 (87.5%)

बसपा

2 (12.5%)

सपा

0 (0%)

कांग्रेस

0 (0%)

 

नगर पालिका अध्यक्ष (कुल सीट-198)

बीजेपी

70 (35.3%)

बसपा

29 (14.6%)

सपा

45 (22.7%)

कांग्रेस

9 (4.5%)

निर्दलीय व अन्य

45 (22.7%)

 

नगर पंचायत अध्यक्ष (कुल सीट-438)

बीजेपी

100 (22.83%)

बसपा

45 (10.27%)

सपा

83 (18.9%)

कांग्रेस

17 (3.8%)

निर्दलीय व अन्य

193 (44.6%)

 

इसका मतलब साफ़ है कि नगर निगम मेयर से लेकर पार्षद और नगर पालिका से लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों पर भारतीय जनता पार्टी ने परचम लहराया है लेकिन नगर पालिका और नगर पंचायत सदस्यों के लिए वार्डों में हुए चुनाव पर बीजेपी अपनी साख नहीं बचा पाई। अब सवाल ये उठता है कि क्या गांव- देहातों में भाजपा का वजूद ख़त्म हो रहा है।

“EVM से छेड़छाड़ न होती तो और जीतते”

 

बसपा इस चुनाव में अपनी साख बचाने में कामयाब रही। 16 में से 2 महापौर पदों पर बहुजन समाज पार्टी ने अपना परचम लहराया। इस जीत से खुश बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस कर ईवीएम और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर वोटिंग मशीन से छेड़-छाड़ न होती तो ये आंकड़ा कहीं ज्यादा होता। निकाय चुनाव में भी बीजेपी पर ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए मायावती ने कहा कि अगर इस बार बीजेपी EVM से छेड़छाड़ नहीं करती तो हमारे और भी मेयर जीतते और सीटें भी ज्यादा मिलती। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर बीजेपी ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराती है तो किसी भी हाल में सत्ता नहीं हासिल कर सकती। भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए मायावती ने कहा कि वह देशभर में रैलियां करने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने के लिए वह सर्व समाज के आने के लिए भी तैयार हैं।

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