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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

बिना अनुमति के धार्मिक और सार्वजनिक स्‍थलों पर लाउडस्पीकर नहीं बजाए जा सकेंगे। इसके लिए मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने आदेश भी जारी कर दिया है। प्रदेश के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने जिलाधिकारियों और वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षकों को टीम बनाकर ऐसी जगहों का चिन्‍हांकन, अनुमति देने और 15 जनवरी के बाद बिना अनुमति के लाउडस्‍पीकर बजने पर कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। राजस्‍व और पुलिस की टीमें 10 जनवरी तक चिन्‍हींकरण, संचालक को नोटिस के साथ आवेदन पत्र दिया जाएगा।

 

 

उल्‍लेखनीय है कि  20 दिसंबर 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से प्रश्‍न किया था कि धार्मिक और सार्वजनिक जगहों पर किसके आदेश से लाउडस्पीकर बज रहे हैं। धार्मिक स्‍थलों पर लाउडस्पीकर बजाने को लेकर दायर की गई जनहित याचिका को लेकर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के गृह सचिव,  मुख्य सचिव और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के प्रमुख को तलब किया था।
 

 

जिला प्रशासन-पुलिस की टीमें 10 जनवरी तक सार्वजनिक और धार्मिक स्‍थलों पर जाकर भौतिक निरीक्षण करेंगी। इस दौरान कहां पर कितने ध्‍वनि यंत्र-लाउडस्‍पीकर बिना अनुमति के प्रयोग किए जा रहे हैं। उनके संचालकों या प्रबंधकों से जानकारी करेंगे। अनुमति ना होने पर नोटिस और निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र प्रबंधकों को दिया जाएगा। निर्धारित प्रारूप में आवेदन आने के बाद थाना एवं तहसील स्‍तर से रिपोर्ट ली जाएगी। फिर नियमानुसार सशर्त अनुमति मिलेगी।

 

यदि 15 जनवरी तक प्रबं‍धकों ने अनुमति नहीं ली और लाउडस्‍पीकर का प्रयोग किया तो 20 जनवरी तक सभी को जब्‍त किया जाए। आदेश के क्रम में क्‍या कार्रवाई हुई इस बाबत शासन और उत्‍तर प्रदेश प्रदूषण बोर्ड को 22 जनवरी तक अवगत कराना होगा। इस दौरान जो भी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य में फेल होते हैं उनके खिलाफ क्‍या कार्रवाई हुई इसे भी शासन को बताना होगा। 

 

75 डेसीबल से तेज नहीं बजेगा डीजे

अब बारात में तेज आवाज में डीजे सुनने को नहीं मिलेगा। इसके लिए शासन ने 75 डेसीबल तक सीमित कर दिया है। इतना ही नहीं अब डीजे बजाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति भी लेनी होगी। ऐसा ना करने पर अर्थ दंड से लेकर जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। क्‍योंकि नियमों के उल्‍लंघन पर पांच साल की कैद या एक लाख रुपये का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।

 

 

यह है मानक-

ध्‍वनि प्रदूषण नियम 2000 के अनुसार नियमावली के अनुसार औद्योगिक, वाणिज्यिक, रिहायशी और शांत क्षेत्रों में दिन-रात के समय में अधिकतम ध्‍वनि तीव्रता को निर्धारित किया गया है। इसमें से इंडस्ट्रियल एरिया में दिन के समय में 75 डेसीबल, रात में 70 डेसीबल, व्‍यावसायिक क्षेत्रों में दिन में 65, रात में 55 डेसीबल, रिहायशी क्षेत्रों में दिन के दौरान 55 और रात में 45 डेसीबल एवं शांत क्षेत्रों के लिए दिन में 50 और रात के लिए 40 डेसीबल ध्‍वनि का निर्धा‍रण किया गया है। सुबह छह बजे से 10 बजे और रात में 10 बजे से सुबह छह बजे तक ध्‍वनि विस्‍तारक यंत्रों का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा।

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