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अयोध्या राम की धरती है, मंदिर वहीं बनेगा: वसीम

UP | 13-Nov-2017 15:40:18 | Posted by - Admin

 

  • राम मंदिर मुद्दे पर गलत दिशा में रविशंकर
   
Latest Updates over Ram Mandir Dispute

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

अयोध्‍या में राम मंदिर विवाद के मसले को लेकर सोमवार को शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने इलाहाबाद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा, "अयोध्या राम की धरती है, वहां राम का ही मंदिर बनेगा। अगर मुस्लिम समुदाय चाहता है कि मस्जिद बने, तब मुस्लिम आबादी को देखते हुए एक मस्जिद का निर्माण कराया जा सकता है। वैसे फैजाबाद और अयोध्या में रहने वाले मुसलमानों के लिए पर्याप्त मस्जिदें हैं।"

 

 

रिजवी ने कहा, "बातचीत को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई अधिकार नहीं बनता है। मस्जिद शियाओं की है। इस मामले का हल शिया वक्फ बोर्ड ही निकालेगा। लोगों की भावनाओं और हित को देखते हुए अयोध्या में उसी जगह पर राम मंदिर का निर्माण होगा।" वसीम रिजवी ने दावा किया कि, "राम मंदिर मुद्दे पर शिया वक्फ बोर्ड और हिंदू पक्षकारों के बीच सहमति बन गई है। सहमति के बाद अब शिया वक्फ बोर्ड 15-16 नवंबर को अदालत में समझौते की कॉपी को जमा करेगा।"

 

उन्‍होंने कहा,"1944 में ही सुन्नी वक्फ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुका है। वो पूरी तरीके से अवैध है। इस तरीके से जब उनका अधिकार ही नहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड क्यों हस्तक्षेप कर रहा है।"

 

वहीं इससे पहले राम मंदिर विवाद के मसले का हल निकालने में जुटे श्री श्री रविशंकर के प्रयासों पर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सवाल उठाते हुए कहा है कि श्री श्री रविशंकर गलत रास्ते पर जा रहे हैं। शिया बोर्ड को रविशंकर द्वारा दिल्ली में सुन्नी मौलानाओं से मुलाकात करने पर ऐतराज है।

 

 

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा है कि रविशंकर जी का जो प्रयास है वो गलत दिशा की तरफ है। वो उन लोगों से बातचीत का प्रयास कर रहे हैं जिन्होंने आजादी के बाद से लेकर कभी सुलह समझौते की कोशिश नहीं की। उनकी दुकान इस फसाद की वजह से चल रही है। वो उन दुकानों के शटर बंद कर सुलह समझौता नहीं चाहते और कुछ मुल्लाओं की मठाधीशी की वजह से आज इस माहौल पर हिंदुस्तान पहुंच गया है, जो बाबरी मस्जिद वहां पर शहीद हुई वो इसी टकराव का नतीजा है।

अगर उस वक्त आपस में बैठकर सुलह समझौते की बातचीत हो जाती तो ये नौबत ना आती। गौरतलब है कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी सोमवार को अखाड़ा परिषद के अध्य्क्ष नरेंद्र से मिलने पहुंचे हैं।

 

 

 

वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने ये भी कहा कि जिनकी चीज नहीं है उनसे बातचीत की जा रही है। वही तो देश को खराब कर रहे हैं, वही फसाद करने की और देश का माहौल खराब कराने का प्रयास कर रहे हैं, तो उनसे बात करने से कोई फायदा नहीं है और जहां पर मंदिर है वहां मंदिर बनाना चाहिए और मुस्लिम आबादी जहां पर है वहां मस्जिद बननी चाहिए।

 

अगर आपसी बातचीत बनती है तो बहुत अच्छा, सुलह का एक मसौदा तैयार हो सकता है। शिया वक्फ बोर्ड इसमें पूरी कोशिश कर चुका है। हिन्दू पक्षों से बातचीत हो चुकी है और हिन्दू पक्ष तैयार भी है। अब इसको किस तरह से कानूनी अमली जामा पहनाया जाए इस पर बातचीत हो। इस पर हम अखाड़ा परिषद से सहमति लेने आए हैं।

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