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दि राइजिंग न्‍यूज

गाजियाबाद।

 

बहुचर्चित निठारी कांड के 9वें केस में मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेन्द्र कोली को दोषी करार दिया गया है। कोर्ट इस मामले में सजा पर फैसला शुक्रवार को करेगा। ये मामला सीबीआइ की विशेष अदालत में चल रहा था। निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर मुख्‍य आरोपी हैं।

बता दें कि मोनिंदर-सुरेन्द्र कोली पर निठारी कांड से कुल 16 केस चल रहे हैं। आठ मामलों में फैसला सुनाया जा चुका है।

 

 

9वां मामला मोनिंदर पंधेर के घर में काम करने वाली मेड अंजलि का है। इसकी रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। कोठी से मेड के खून से सने कपड़े बरामद किए गए थे। अदालत ने 376, 302 और 201 सेक्शन में मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेन्द्र कोली को दोषी माना है। अब इस मामले में दोनों आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी।

 

 

इन मामलों में सुरेंद्र कोली को हुई है फांसी की सजा

  • 13 सितंबर 2009 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या में फांसी की सजा सुनाई।
  • 12 मई 2010 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या में फांसी की सजा सुनाई।
  • 28 सितंबर 2010 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई।
  • 22 दिसंबर 2010 को कोर्ट ने एक बच्ची के मर्डर के आरोप में फांसी सुनाई।
  • 24 दिसंबर 2012 को कोर्ट ने एक बच्ची की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई।
  • सात अक्टूबर 2016 को एक महिला की हत्या के आरोप में कोर्ट ने फांसी की सजा दी।
  • 16 दिसंबर 2016 को कोर्ट ने एक युवती की हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई।
  • 24 जुलाई 2017 को सुरेंदर कोली को फांसी की सजा सुनाई गई है।

 

मोनिंदर सिंह पंधेर को दो मामलों में हुई सजा

  • 13 फरवरी 2009 को कोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई है।
  • 24 जुलाई 2017 को मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी की सजा सुनाई गई है।

 

 

कैसे सामने आया मामला?

सात मई 2006 को पायल नाम की एक लड़की रिक्शे से पंढेर के घर आई। उसने रिक्शेवाले को लौटकर पैसे देने को कहा। काफी देर तक जब वो नहीं लौटी तो रिक्शेवाले ने कोठी का दरवाजा खटखटाया। वहां कोली ने उसे बताया कि पायल वहां से जा चुकी है। रिक्शेवाले ने कहा कि वह यहीं खड़ा था, पायल बाहर नहीं आई। यह बात पायल के माता-पिता को पता चली तो उन्होंने बेटी के लापता होने की एफआइआर दर्ज करवाई।

 

 

पुलिस को पता चला कि पायल के पास एक मोबाइल था, जो स्विच ऑफ बता रहा था। पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल निकाली और इससे मिले सुराग के आधार पर पंढेर की कोठी पर छापा मारा। पुलिस को यहां से बच्चों की हड्डियां और अंग मिले तो इस कांड का खुलासा हुआ।

यह भी पता चला कि निठारी के आसपास की झुग्गियों से कई बच्चे लापता हुए थे, लेकिन परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने एफआइआर दर्ज नहीं की थी।

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