Box Office Collection of Dhadak and Student of The Year

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ

 

अच्छे दिन के सपने दिखाकर सत्ता में पहुंची भारतीय जनता पार्टी विकास छोड़ एक बार फिर भगवान राम की शरण में पहुंच गई है। इसी के बहाने निकाय चुनाव में बेड़ा पार लगाने की मुहिम भी चल निकली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नगरीय निकाय चुनाव के प्रचार अभियान की शुरुआत अयोध्या से कर भाजपा के एजेंडे को धार देने का प्रयास किया। अपने संबोधन में उन्होंने मथुरा–वृंदावन में होली खेलने की बात तक कह डाली।

 

 

इस धार को और पैनापन मिला, बुधवार को श्रीश्री रविशंकर के पहुंचने से। उन्होंने भी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मध्यस्थता की पहल की है। खास बात यह है कि श्री श्री से मध्यस्थ बनाने की गुजारिश–अपील किसने की, यह किसी को नहीं मालूम। हालांकि उनकी यह पहल वोटों के ध्रुवीकरण को बढ़ा रही है और शायद यह भाजपा को भी रास आ रहा है।

 

 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा बाबरी एक्शन कमेटी पहले ही इस तरह के किसी पहल से इंकार कर चुकी है। पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य एवं अधिवक्ता जफरयाब जिलानी तो बातचीत के लिए कोई न्योता मिलने से ही इंकार कर देते हैं। उनके मुताबिक किसी ने उनसे इस बाबत कोई बात की है और न ही वार्ता के बारे में बताया है।

ऐसे में सवाल यह भी अहम हो जाता है कि बिना पक्षकारों के पहल किस तरह से की जा रही है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संवाद को ही किसी मसले को हल करने का सबसे बेहतर जरिया बताते हैं। इस कारण वह श्री श्री के प्रयासों की प्रशंसा भी करते हैं।

 

 

देश में चुनावों की सरगर्मी तेजी से बढ़ रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव भले ही एक बड़े स्‍तर पर है लेकिन बीजेपी इसके साथ ही प्रदेश के सबसे छोटे स्‍तर के निकाय चुनाव को भी नजरअंदाज करती नहीं दिख रही है।

 

 

वैसे भी प्रदेश में निकाय चुनावों को मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ की पहली परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। लिहाजा मुख्यमंत्री भी अब पूरे जोर शोर से प्रचार में जुट गए हैं। विकास, कानून व्यवस्था को बताने के लिए लंबे चौड़े आकंड़े हैं, मगर हकीकत में महंगाई को काबू करने के लिए सरकार को प्याज–टमाटर बेचना पड़ रहा है। ऐसे में जनता को रिझाने का सर्वोत्तम जरिया राम मंदिर ही समझ में आ रहा है और भाजपा उसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

बात सर्वोच्च न्यायालय की हो रही है, लेकिन जिद मंदिर वहीं बनाने की है। दरअसल, प्रदेश के निकाय चुनाव का असर गुजरात राजनीति पर भी पड़ेगा। शायद यही कारण है कि पार्टी के सभी वरिष्‍ठ नेता कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते।

 

 

विपक्षी असमंजस में

भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व एजेंडे के आगे विपक्षी दल भी खुद को असहज मान रहे हैं। शिया वक्फ बोर्ड के चर्चित चेयरमैन वसीम रिजवी के राम मंदिर प्रकरण में सक्रियता और स्थान को शिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति करार देने के बाद सियासत कहीं ज्यादा तेज हो गई है। वजह है कि इस पूरे विवाद में कभी शिया वक्फ बोर्ड नहीं था।

 

 

भाजपा सरकार बनने के बाद कुछ समय बाद अचानक ही वह भी इसमें फांद पड़े। यही नहीं कोर्ट की गाइड लाइन के आधार पर बातचीत के जरिए माहौल बनाने श्रीश्री रविशंकर तक पहुंच गए। दूसरी तरफ विपक्षी सियासी दल इसे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता विजेंद्र त्रिपाठी के मुताबिक केवल लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा राम नाम जपने लगी है। अन्यथा किसी वर्ग के लोग भाजपा के शासन से खुश नहीं है।

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement

Loading...

Public Poll