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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

प्रदेश की योगी सरकार 46 मदरसों की अनुदान राशि रोकने के बाद अब सख्त रुख अपनाते हुए उन मदरसों को बंद करने की तैयारी कर रही है, जो बिना सरकारी मान्यता के चल रहे हैं। सरकार की नजर उन मदरसों पर है, जो दीनि मान्यता लेकर चल रहे हैं। दीनि मान्यता का मतलब, इन मदरसों ने कहीं से कोई सरकारी मान्यता नहीं ली है, बल्कि दारुल ऊलूम, नदवां, देवबंद जैसे शिक्षण संस्थानों से मान्यता लेकर अपने संस्थान को चलाते हैं।

 

 

योगी सरकार इन मदरसों की स्क्रीनिंग करा रही है। स्क्रीनिंग के बाद बिना सरकारी मान्यता वाले मदरसों को 30 दिन का वक्त मिलेगा। उन 30 दिनों में ये प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अगर इन 30 दिनों में मान्यता नहीं हुई, तो ये संस्थान अवैध मदरसों की कैटगरी में आ जाएंगे, फिर उन्हें बंद करना होगा।

 

 

अवैध रूप से यूपी में चल रहे करीब 1298 मदरसों योगी सरकार स्क्रीनिंग करा रही है। ऐसे मदरसों को बंद करते हुए उनके संचालकों केा जेल भेजने की तैयारी भी सरकार कर रही है। प्रदेश में लगभग 563 मदरसे हैं, जिनकी सरकार के नियमों के अनुसार मान्यता है। इसके अलावा चल रहे मदरसों ने किसी तरह की कोई सरकारी मान्यता नहीं ली है।

 

 

सरकार ने ऐसे संस्थानों को जल्द ही नोटिस जारी करते हुए अल्टीमेटम दिया जाएगा। 30 दिनों के अंदर मान्यता से जुड़े सभी दस्तावेज जमा कराकर उन्हें मान्यता लेनी होगी। उसके बाद भी अगर मदरसे चलते रहे तो अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड उन पर पर एफआइआर दर्ज कराएगा।

 

मदरसों को मॉर्डन बनाने का प्लान

जिला अल्पसंख्यक कल्याण ऑफिस के एक अधिकारी के अनुसार सरकार मदरसों पर सख्ती के पीछे उन्हें मॉर्डन बनाने का उद्देश्य है। इसे किसी प्रकार से गलत रूप में नहीं लेना चाहिए। स्कूलों में सीसीटीवी, स्मार्ट क्लास रूम, पीने के पानी के लिए वाटर कूलर, और पढ़ाने वाले टीचर और स्टॉफ का वेरिफिकेशन कराना होगा।

इनके अलावा मदरसों में हिंदी, संस्कृत, गणित, व इंग्लिश पढ़ाना भी अनिवार्य होगा। अभी तक मदरसों में धार्मिक पढ़ाई के साथ-साथ उर्दू, अरबी की पढ़ाई ही होती है।

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