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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

प्रदेश में कक्षा से छह से आठ तक के बच्चे अब बाबा गोरखनाथ की बायोग्राफी भी अपने पाठ्यक्रम में पढ़ेंगे। इसके साथ ही उन्हें रानी आवंति बाई, गोरखपुर के चौरी चौरा कांड में नायक बाबू बंधु सिंह तथा आल्हा-उदल को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। बच्चों की नई किताबों में यह पाठ्यक्रम शामिल कर दिया गया है। हालांकि इसे लेकर अब राजनीति भी तेज हो गई है। सबसे ज्यादा सियायत बाबा गोरखनाथ को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने को लेकर है।

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं। बाबा गोरखनाथ भी नाथ संप्रदाय के संत थे। उनके अनुयायी भी बड़ी संख्या में है। इसी को देखते हुए नए पाठ्यक्रम में बाबा गोरखनाथ की जीवनी को शामिल किया गया है। इसके अलावा बच्चों के पाठ्यक्रम में कई नए अध्याय शामिल किए गए हैं। इसका मकसद बच्चों को उन लोगों के जीवन दर्शन से अवगत कराना है जिन्होंने समाज के निर्माण और देश सेवा में अपना योगदान दिया।

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने बच्चों के पाठ्यक्रम में नए अध्यायों को गलत करार दिया है। सपा प्रवक्ता का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी इतिहास के साथ खिलवाड़ कर रही है। कम से कम यह जरूर देखा जाना चाहिए कि बच्चे जिन्हें पढ़ेंगे, उनका समाज निर्माण या समाज के लिए क्या योगदान रहा।

 

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