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मुख्यमंत्री आवास-विधानसभा और राजभवन के सामने आलू ही आलू

UP | 06-Jan-2018 12:05:46 | Posted by - Admin

 

 

  • आलू की कीमत दस रुपये किलो करने की मांग

  • सरकार से नाराज किसानों ने जताया विरोध

   
Farmers Protest in Lucknow City in Front of Government Buildings

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

महंगी बिजली और बाजार में आलू की कीमत न मिलने से नाराज किसान शुक्रवार देर रात राजभवन से लेकर विधानसभा के सामने तक आलू फेंक गए। खास बात यह है कि सुनियोजित तरीके से किसान आलू फेंक कर चले गए और राजधानी की मुस्तैद पुलिस सर्दी में सोती रहीं। सुबह दोनों भवनों के सामने आलू होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस हरकत में आई और उसके बाद शुरु हुआ सड़क से आलू हटवाने का काम। बावजूद इसके लिए कार्यालय खुलने के वक्त तक सड़क से आलू साफ नहीं हो पाया था। उधर भारतीय किसान यूनियन के नेता ने आलू के बहाने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को ही सवालों में खड़ा कर दिया। 

 

 दरअसल अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत आलू किसानों का रोष लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के नेता हरनाम सिंह वर्मा कहते हैं कि मुख्यमंत्री आवास, राजभवन और विधानसभा जैसे स्थान पर तो हर वक्त सुरक्षा रहती है, फिर किसान कैसे आलू फेंक गए, यह सरकार जांच करें। अगर कभी यहां पर किसानों ने आकर फांसी लगा ली तो क्या होगा। उन्होंने कहा कि आलू किसान को आलू का कोई भाव नहीं मिल रहा है। कोल्ड स्टोरेज में 220 रुपये भाड़ा लग रहा है जबकि आलू डेढ़ – दो रुपये किलो के भाव बिक रहा है। किसान फांके काट रहा है और बिचौलिए जेब भर रहे हैं।

यही नहीं, किसान आलू के उत्पादन के बाद इस स्थिति में है कि अगर इसकी भी मुनासिब कीमत नहीं मिली तो वह सड़क पर होगा और आत्महत्या के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं होगा। उन्होंने किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है और अब बड़ा आंदोलन होगा। सरकार केवल कागजी आंकड़े गिना रही है लेकिन हकीकत में कहीं कुछ नहीं हो रहा है। सरकार 14 दिन में गन्ने का भुगतान कराने की मांग कर रही है जबकि लखीमपुर गोला में गन्ना किसान पिछले डेढ़ महीने से धरने पर बैठे हैं। लोगों की तबियत बिगड़ रही है लेकिन सरकार गन्ना किसानों का भुगतान कराने का दम भर रही है। सरकार के इसी रवैये से किसानों की नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सरकार को बदनाम करने की साजिश

प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मुख्यमंत्री आवास, राजभवन और विधानसभा पर आलू फेकें जाने को  सरकार को बदनाम करने की साजिश करार दिया। पत्रकारवार्ता में उन्होने कहा कि प्रदेश में कोई पुराना आलू शेष नहीं है। राज्य में 120 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारण की व्यवस्था है। जो आलू फेंका गया कि वह मंडियों से छटां हुआ है। योगी सरकार ने प्रदेश के आलू किसानों के लिए बहुत काम किया। प्रदेश में आलू 467 रुपये प्रति क्विटंल की दर से खरीद की जा रही है। राज्य से बाहर जाने पर मंडी शुल्क व भाड़े में भी छूट दी जा रही है।  

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