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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

भ्रष्टाचार को लेकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ और ज्‍यादा सख्‍त हो गए हैं। उन्होंने अभियोजन स्वीकृति के लिए पिछले 20 साल से लटके लगभग 400 मामलों को 60 दिनों में निपटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बड़े अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई हो, ताकि यह दूसरों के लिए एक नजीर बने। मुख्यमंत्री ने ये निर्देश मंगलवार को प्रदेश की सभी जांच एजेंसियों की समीक्षा के दौरान दिए।

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के सामने ऐसे करीब 400 लोगों की डिटेल रखी गई, जिनके मामले लंबित हैं। इसमें सीबीसीआइडी, विजलेंस, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, आर्थिक अपराध शाखा और एसआइटी के मामले शामिल हैं। इसमें कई आइएएस, आइपीएस और अन्य अधिकारियों के साथ-साथ कई दलों के नेता भी शामिल हैं।

टास्‍क फोर्स का गठन

इसके लिए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें सभी जांच एजेंसियों के विभागाध्यक्ष सदस्य होंगे। टास्क फोर्स प्रमुख सचिव को भी लंबित मामलों में निर्देश दे सकती है। साथ ही किसी जांच में तेजी लाने और कार्रवाई करने के लिए भी एजेंसी को टास्क फोर्स निर्देशित कर सकती है।

20-20 साल से लंबित हैं मामले

सूत्रों के मुताबिक, विजलेंस और आर्थिक अपराध शाखा के कई मामले 20-20 साल से स्वीकृति के इंतजार में हैं। कुछ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं पर, उनकी जांच लंबित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों को तेजी से निपटाएं और भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें।

इस साल पकड़े गए रिश्वतखोरी के इतने मामले

पुलिस उपाधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार या इनसे ऊपर की रैंक के अधिकारियों के खिलाफ आने वाली भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच विजलेंस करती है, जबकि बाकी मामलों में भ्रष्टाचार निवारण संगठन कार्रवाई करता है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने इस साल अब तक 46 मामले रिश्वत खोरी के पकड़े हैं, इनमें पांच पुलिस से संबंधित हैं। 20 मामले अभियोजन स्वीकृति के लिए लंबित हैं।

वहीं, सीबीसीआइडी के लंबित 39 केस में से 21 की अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। सबसे अधिक मामले विजलेंस के हैं, जिनकी अभियोजन स्वीकृति शासन में लंबित है। मुख्यमंत्री ने इन सभी मामलों में वरीयता के आधार पर अभियोजन स्वीकृति देने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, डीजीपी ओम प्रकाश सिंह, डीजी सीबीसीआइडी वीरेंद्र कुमार, डीजी विजलेंस हितेश चंद्र अवस्थी, डीजी ईओडब्ल्यू आरपी सिंह और डीजी भ्रष्टाचार निवारण संगठन विश्वजीत महापात्रा समेत कई अधिकारी शामिल थे।

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