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दि राइजिंग न्‍यूज

फर्रुखाबाद।

 

प्रदेश में योगी सरकार भले ही लाखों किसानों का कर्ज माफ करने का दम भर रही हो, लेकिन हकीकत और आंकड़ों तो कुछ और ही बयां करते हैं। उन्‍हें देखने से तो लगता है कि यह उनके साथ बड़ा मजाक है। फर्रुखाबाद की सूची में काफी संख्या में ऐसे किसान भी शामिल हैं जिनका माफ हुआ कर्ज सौ रुपये से भी कम है। बलवीर व उसकी मां का तो मात्र 51 पैसे का कर्ज माफ हुआ है। फिलहाल तो 51 पैसा चलन में ही नहीं है।

 

 

 

जिला प्रशासन के करीब दो माह तक कई स्तर के सर्वेक्षण, जांच, सत्यापन व पुनर्सत्यापन के बाद कर्ज माफी का पहला चरण पूरा हो चुका है। इसमें 17,529 किसानों के ऋण माफ करने की घोषणा की गई। 11 सितंबर को प्रभारी मंत्री चेतन चौहान ने जनपद के 5042 किसानों को ऋण-मोचन अधिकार पत्र वितरित किए थे।

 

 

बता दें कि आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की नवाबगंज शाखा के खातेदार बलवीर सिंह व उनकी मां का 0.51 रुपये का व रामपाल 80.87 रुपये का ऋण माफ किया गया। इसी बैंक की मेरापुर शाखा के जगमोहन का छह रुपये का, मुरहास शाखा की मान देवी पत्नी रामदत्त का 9.89, राईपुर चिनहटपुर शाखा के शिवराज शाक्य 36, रजीपुर शाखा की मुन्नी देवी का 38, लिंजीगंज के रामबहादुर सिंह का 31.80, भरखा के राजेंद्र का 40.54 व विजेंद्र सिंह का 20 रुपये का कर्ज माफ हुआ है।

 

 

बैंक ऑफ इंडिया की गनीपुर जोगपुर शाखा के कमर अली उर्फ कल्लन का 32 व राजेश सिंह का 21 रुपये का, बैंक ऑफ इंडिया की कंपिल शाखा के राधेश्याम सिंह का दस व उनके भाई ज्ञानेंद्र सिंह का नौ रुपये, इसी बैंक की मोहम्मदाबाद शाखा के निहाल सिंह का चार रुपये व फेरू सिंह का 33 रुपये का कर्ज माफ हुआ है।

 

वहीं जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक एनआर चौधरी बताते हैं कि शासन के निर्देश पर 31 मार्च 2016 तक किसानों का जितना कर्ज था, उसमें से अधिकतम एक लाख तक का कर्ज माफ करने के निर्देश थे।

कई किसानों ने अपने लोन जमा तो कर दिए थे, लेकिन ब्याज के कुछ पैसे या रुपये बाकी रह गए थे। कंप्यूटर ने ऐसे सभी खाते सूची में शामिल कर दिए। इसके पीछे किसी उद्देश्य को तलाशना गलत होगा।

 

 

खेत बेचकर चुकाया बैंक का पैसा

फर्रुखाबाद के नवाबगंज में ग्राम चंदनी निवासी बलवीर व उसकी मां बिटोली देवी ने आर्यावर्त ग्रामीण बैंक से 90 हजार रुपये कर्ज लिया था। लोन के रुपयों से खेत मे आलू व गेहूं की फसल की। गेहूं तो खाने भर को हुआ, जबकि आलू में मंदी के कारण लागत भी नहीं निकल सकी। बैंक कर्मियों ने ऋण अदायगी का दबाव बनाया तो उन्हें अपना डेढ़ बीघा खेत बेचना पड़ा।

 

 

बिटोली देवी ने खेत बेचकर 19 सितंबर 2016 को 93711 रुपये जमा कर कर्ज चुका दिया। इसके बाद लेखपाल ने कर्जमाफी की उम्मीदें जगाकर खतौनी, आधार कार्ड व अन्य कागजी औपचारिकता पूरी कराई। इसमें उसके लगभग 400 रुपये भी खर्च हो गए। मात्र 51 पैसे की कर्जमाफी की सूचना पाकर बलवीर व बिटोली देवी ठगा सा महसूस कर रहे हैं। बलवीर तो मेहनत मजदूरी के लिए दिल्ली चला गया है।

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