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फिक्स थी गायत्री प्रजापति की जमानत!

UP | Last Updated : Jun 20, 2017 11:53 AM IST

  • जांच में खुलने लगी गायत्री को जमानत की हकीकत
  • आरोप- जमानत के लिए दी थी 10 करोड़ की घूस

   
case of corruption in bail in the case of gayatri prajapati

दि राइजिंग न्यूज 

संजय शुक्ल

लखनऊ।

  

समाजवादी पार्टी में कद्दावर कबीना मंत्री गायत्री प्रजापति सरकार को कितने अजीज थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गायत्री प्रजापति को जमानत दिलाने के लिए एक न्यायाधीश को पास्को अदालत का जज बना दिया गया। वह भी तब जबकि न्यायाधीश का 30 अप्रैल 2017 को रिटायरमेंट था। हालांकि बाद में सारा भेद खुलने पर रिटायरमेंट के चार दिन पहले ही उन्हें निलंबित कर दिया गया। यह तमाम बातें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जा रही जांच में सामने आईं हैं। गायत्री पर ये भी आरोप है कि उन्‍होंने अपनी जमानत के लिए करोड़ों रुपये की घूस दी थी।

 

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक गायत्री प्रजापति पर गैंगरेप के आरोपी पूर्व कबीना मंत्री गायत्री प्रजापति पर पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पास्को अदालत में उस वक्त न्यायाधीश लक्ष्मीकांत थे लेकिन उनकी छवि ईमानदार व सख्त जज के रूप में है, इस कारण से उन्हें पोस्को अदालत से स्थानांतरित कर दिया गया।


उनके स्थान पर न्यायाधीश ओपी मिश्रा को पास्को अदालत का चार्ज दे दिया गया। जबकि ओपी मिश्रा 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे थे। बावजूद इसके उन्हें चार्ज दिया गया। उन्होंने गायत्री प्रजापति मामले की सुनवाई के बाद गायत्री को जमानत भी दे दीं। बाद में यह सारा मामला खुला तो गत 26 अप्रैल 2017 न्यायाधीश ओपी मिश्रा को निलंबित कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण की जांच इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे। जांच में अब पूरा मामला खुलता जा रहा है।

 

अधिवक्ता व पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध


जांच में गायत्री प्रजापति की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं तथा पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली हैं। यानी पूरे प्रकरण को फिक्स करके ही गायत्री प्रजापति को जमानत दी गई थी। उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण की जांच करने वाली क्षेत्राधिकारी अमिता सिंह के खिलाफ हुई जांच में उन पर लगे पीड़िता के उत्पीड़न के आरोप सही पाए गए हैं। अब न्यायाधीश और अधिवक्ताओं की भूमिका भी सामने आ गई है। 


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