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दि राइजिंग न्‍यूज

इलाहाबाद।

 

इलाहाबाद में जारी की गई फर्जी बाबाओं की लिस्‍ट के मामले में संतो के एक समूह ने सीएम योगी से शास्त्री भवन में मुलाकात की। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के मेंबर के साथ इस मीटिंग में 18 परिषदों के 28 संत शामिल थे। इस मीटिंग में सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने 14 फर्जी बाबाओं पर कार्रवाई की बात कही है।

       

 

इसके साथ ही संतों ने बताया कि अभी और फर्जी बाबाओं को चिन्हित किया जा रहा है। परी अखाड़ा के त्रिकाल भवंता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही अर्द्धकुंभ मेले की तैयारियों को लेकर भी चर्चा हुई। संतों ने इलाहाबाद के नाम बदलकर प्रयागराज रखने का प्रस्ताव दिया।

 

ये हैं लिस्‍ट में शामिल बाबाओं के नाम-

  • आसाराम बापू उर्फ़ आसुमल शिरमालानी।
  • राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर
  • सच्चिदानंद गिरी उर्फ सचिन दत्ता।
  • गुरमीत सिंह सच्चा डेरा सिरसा।
  • ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा।
  • निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह।
  • इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी।
  • स्वामी असीमानंद।
  • ओम नमः शिवाय बाबा।
  • नारायण साईं।
  • रामपाल।
  • कुशमुनि।
  • स्वामी ब्रष्पद।
  • मलखान गिरी।

 

इससे पहले लिस्ट में शामिल आचार्य कुशमुनि और बृहस्‍पत गिरी ने अखाड़ा परिषद की संवैधानिकता पर ही सवाल उठाए हैं। इसके तहत आचार्य कुशमुनि ने अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष नरेन्द्र गिरि को बाकायदा कानूनी नोटिस भेज दिया है। वहीं, कुछ अन्‍य फर्जी-करार बाबा परिषद के खिलाफ नोटिस भेजने की तैयारी में हैं। आशंका है कि फर्जी घोषित बाबाओं के अर्द्धकुंभ में आने पर रोक लग सकती है।

 

 

बता दें, अखाड़ा परिषद ने जिन 14 बाबा को फर्जी घोषित किया है, उनमें इलाहाबाद के सिविल लाइंस के पास बने सिद्धेश्‍वरी गुप्‍त महापीठ के महंत आचार्य कुशमुनि का भी नाम है। सोमवार को उन्‍होंने परिषद के अध्‍यक्ष नरेंद्र गिरी को कानूनी नोटिस भेज दिया।

 

 

कुशमुनि के वकील ज्‍योति गिरी ने नरेंद्र गिरी को लिखा है, ''आपने निराधार तथ्‍यों के आधार पर मेरे मुवक्किल आचार्य कुशमुनि को फर्जी बाबाओं की सूची में रखा है, ऐसा सिर्फ बदला लेने के लिए किया है। अगर आप उनका नाम उस सूची से नहीं हटाते हैं तो आपके ऊपर क्‍यों न मानहानि का मुकदमा किया जाए?''

 

महंत कुशमुनि का कहना है, ''मैं नरेंद्र गिरी के कहने से फर्जी नहीं हो जाऊंगा। अखाड़ा खुद आकर जांच लें कि उनके कितने महंतों पर आपराधिक मुकदमें चल रहे हैं। खुद नरेंद्र गिरी की छवि कोई अच्‍छी नहीं है। मैंने उनको नोटिस भेज दिया है। मैं इनसे न्‍यायालय में निपटूंगा।''

 

वहीं दूसरे बाबा बृहस्पत गिरी ने बरेली में कहा, ''कौन सिद्ध पुरुष है और कौन नहीं, ये नापने का आखाड़ा परिषद के पास क्‍या पैमाना है? हमको निकालने वाले या हमको फर्जी बाबा कहने वाले वो कौन होते हैं, ना तो उन्‍होंने हमें बाबा बनाया ना ही हमारा उनसे कोई वास्‍ता रहा। फिर वो हमें साधु होने या न होने का सर्टिफिकेट कैसे दे सकते हैं।''

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