These Women Film Directors Refuse to work with Proven Offenders

दि राइजिंग न्‍यूज

हरदोई।

 

सांप-बिच्छू से हम सबकी घिघ्‍घी बंधती जाती है, लेकिन हरदोई का रहने वाले शैलेंद्र इस मामले में अपवाद हैं। वह न सिर्फ सांपों के साथ खेलते हैं बल्कि उनके साथ सोते भी हैं। पेशे से शिक्षक शैलेंद्र सांपों-बिच्छूओं के सरंक्षण की मुहिम चला रहे हैं।

इसलिए हरदोई के कोरिया गांव के आस-पास के गांवों में अब कोई भी सांप को नहीं मारता। शैलेंद्र के मुताबिक, उन्हें बचपन से ही सांपों के सरंक्षण का शौक है। हालांकि, इस दौरान दो बार सांप शैलेंद्र को काट चुके हैं।

सांपों से कर ली दोस्ती

कोरिया गांव के मजरा मढ़िया निवासी आचार्य शैलेंद्र राठौर बताते हैं कि उन्होंने सांपों को अपना दोस्त बना लिया है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए सांपों को पालते-पोसते हैं। इसके साथ ही वो जहरीले सांपों का संरक्षण कर उनको बचाने की मुहिम में लगे हुए हैं।

 

 

सांपों को नहीं मारते यहां के लोग

शैलेंद्र राठौर ने बताया कि लोगों ने उनके जुनून को देखा और सहयोग करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि पहले लोग सांप को देखते ही मार देते थे, लेकिन अब उनके गांव के साथ आस-पास के गांव के लोग भी सांपों को नहीं मारते, बल्कि फोन कर उन्हें सूचित कर देते हैं। शैलेंद्र उन्हें पकड़कर स्वयं पालते हैं या फिर उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ देता हैं।

12 साल की उम्र में पकड़ा पहला सांप

शैलेंद्र राठौर को बचपन से ही सांपों को पालने का शोक है। उन्होंने बताया कि बचपन में एक बार उनके मकान के पास एक सांपों का जोड़ा निकला था। उन्होंने उनमें से एक सांप को मार दिया जबकि दूसरा सांप वहीं उस मरे सांप के पास सिर झुका के बैठ गया। सांप का इस प्रकार का समर्पण भाव देखकर उन्होंने उसी दिन से अपना जीवन इन जहरीले सांपों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने 12 साल की उम्र में पहला सांप पकड़ा था।

 

 

दो बार सांपों ने किया हमला

शैलेंद्र ने बताया कि उन्हें दो बार सांपों ने काटा है, जिसके निशान आज भी उसके हाथों पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि क्योंकि उन्हें सांपों को संरक्षित करने का शौक ही था यही वजह है कि वो मेडिकल ट्रीटमेंट के बाद सही हो गए।

सांपों का रखते हैं ख्याल

जहरीले सांप रखने का ही काम शैलेंद्र नहीं करते हैं, बल्कि उन सांपों का पूरी तरह से ख्याल भी रखते हैं। यहां तक उनको नहलाने धुलाने के अलावा उनके खाने पीने, मरहम पट्टी तक का ख्याल शैलेंद्र द्वारा रखा जाता है।

 

 

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