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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कांफ्रेंस के बाद से राजनीति गरमागई है। इस मामले में वरिष्ठ बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के बयान से उलट सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की शिकायत को न्यायपालिका का आंतरिक मसला मानने से इनकार किया है। सिन्हा ने कैबिनेट मंत्रियों से अपील की है कि वे वरिष्ठ जजों को समर्थन दें। वहीं शरद यादव ने इस विवाद के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

 

 

आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यशवंत सिन्हा ने दावा किया कि बीजेपी नेता डरे हुए हैं और इसलिए वे खुलकर जजों का का समर्थन नहीं कर रहे हैं। जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के काम करने के तरीकों पर सवाल उठाने को सिन्हा ने असाधारण कदम बताया है।

 

सिन्हा ने कहा, मीडिया के जरिए जजों ने देश से अपनी शिकायतें साझा कीं, जिसे भी इस देश और लोकतंत्र की चिंता है, उसे आज अपनी आवाज उठानी चाहिए। अगर न्यायपालिका के साथ समझौता होगा, तो इसका दुष्परिणाम सभी पर पड़ेगा।

 

शिवसेना प्रमुख उद्धव का बयान

अब इस मामले में शिवसेना की ओर से भी बयान जारी किया गया है। शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे का कहना है कि क्या ये कोई षडयंत्र है और क्या कानून को गूंगा बहरा बनाने की कोशिश की जा रही है।

 

वहीं जस्टिस लोया की मौत के मामले पर शिवसेना ने कहा कि मामले की जांच होनी बेहद जरूरी है। उद्धव ने कहा कि जो भी शुक्रवार को हुआ वो हिला कर रख देने वाला है। हमें ये समझना चाहिए कि आखिर जजों को ये कदम उठाना ही क्यों पड़ा? लोकतंत्र के चारों स्तंभों को खड़ा रहना होगा अगर वे एक-दूसरे पर गिरने लगे तो ये बेहद खतरनाक होगा।

 

इस मामले को बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने न्यायपालिका का आंतरिक मसला बताया था। इस पर सिन्हा ने कहा कि जब चार जज खुलेआम इसकी शिकायत कर रहे हैं, तो ये न्यायपालिका का आंतरिक मामला कैसे हो सकता है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों, सत्ताधारी सरकार और चुने हुए प्रतिनिधियों को इसकी चिंता करनी चाहिए।

 

 

शरद यादव ने लगाया मोदी सरकार पर आरोप

इस पूरे विवाद के लिए शरद यादव ने सरकार को दोषी ठहराया है। शरद के मुताबिक जजों ने कुछ भी गलत नहीं किया और उन्होंने बेहद दबाव में ये कदम उठाया होगा। अब हालात सामान्य करने की जरूरत है। शरद ने कहा कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का इस मसले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में कोई समस्या नजर नहीं आती।

वहीं सीपीआइएम सूत्रों ने बताया कि डी राजा जस्टिस चेलमेश्वर से मिलने नहीं गए। CPIM ने कहा कि ये न्यायिक प्रशासन का सांस्थानिक मसला है।

 

 

बीजेपी के बागी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना ही चाहिए। लोगों के सामने ये मामला चार जज लेकर आए हैं। इतना गंभीर विषय उठाने वाले जजों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जा रहा है।

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