FIR Registered Against Singer Abhijeet Bhattacharya For Misbehavior From Woman

दि राइजिंग न्यूज़

बंगलुरु।

 

कर्नाटक में जीत के बाद भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। इसका सारा श्रेय राज्य के कद्दावर भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को ही जाता है। राज्य में पहली बार भाजपा की गठबंधन सरकार बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में बनी थी और अब तीसरी बार भी दक्षिण भारत के इस प्रचुर राज्य में भाजपा की सरकार येदियुरप्पा की अगुवाई में ही बनने जा रही है। इस तरह हम येदियुरप्पा को कर्नाटक में भाजपा का पर्याय कह सकते हैं।

जातीय समीकरण और जोड़-तोड़ के बड़े खिलाड़ी...

पिछले 46 सालों से राजनीति कर रहे रहे बीएस येदियुरप्पा को दक्षिण की राजनीति का एक बड़ा स्तंभ कहा जाता है। जातीय समीकरण को साधना हो या जोड़-तोड़ से सत्ता को मुकम्मल करना हो, येदियुरप्पा इन सबमें एक कुशल और मंझे हुए नेता के रूप में सामने आते रहे हैं। ताजा चुनावी परिणाम शायद इसी कहानी को दोहरा रहे हैं। 

 

लिंगायत समुदाय में येदियुरप्पा का जन्म हुआ...

राज्य के मांड्या जिले के बुकानाकेरे में 27 फरवरी 1943 को लिंगायत समुदाय में येदियुरप्पा का जन्म हुआ। अहम तथ्य यह है कि इस समुदाय का राज्य के वोट बैंक में विशेष प्रभाव है। येदियुरप्पा छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। उन्हें 1972 में शिकारीपुरा तालुका जनसंघ का अध्यक्ष चुना गया। तब से लेकर आज तक येदियुरप्पा ने कर्नाटक में जनसंघ और भाजपा की अलख जलाए हुए हैं। राजनीति के साथ उन्होंने अपनी नौकरी भी जारी रखी। वह एक चावल मिल में क्लर्क का भी काम करते रहे। 1977 में उन्हें जनता पार्टी का सचिव बनाया गया। 1983 में वह पहली बार विधानसभा पहुंचे। दो बार राज्य में भाजपा के अध्यक्ष रहे।

पहला कार्यकाल रहा 7 दिनों का...

2007 में 12 नवंबर को वह राज्य के पहली बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि, वह ज्यादा दिन तक इस कुर्सी पर बने नहीं रह पाए और जेडीएस से मंत्रालयों के प्रभार को लेकर हुए विवाद के बाद 19 नवंबर 2007 को ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

 

2008 में फिर खिला कमल...

साल 2008 में राज्य में फिर से कमल खिला और येदियुरप्पा ही भाजपा के सबसे लोकप्रिय चेहरे थे। लिहाजा उन्हें मुख्यमंत्री का पद सौंपा गया। तीन साल दो महीने का उनका दूसरा कार्यकाल काफी विवादों में रहा। कथित भूमि घोटाले से लेकर खनन घोटाले तक उनका नाम आया। इसके बाद लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद उनकी कुर्सी चली गई।

आलाकमान ने येदियुरप्पा को नहीं किया नजर अंदाज...

कुर्सी जाने के बाद नाराज होकर येदियुरप्पा भाजपा से अलग हो गए। राजनीतिक पंडितों ने अनुमान लगाया कि येदियुरप्पा समूचे लिंगायत फैक्टर के साथ राज्य की राजनीति तय करेंगे। भाजपा आलाकमान ने येदियुरप्पा के लिंगायत समुदाय के साथ जुड़ाव को देखते हुए उन्हें मनाने की कोशिश की और वह भाजपा में फिर से सक्रिय हो गए। इसके बाद 2018 के चुनाव में पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया और नतीजा सबके सामने है।

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement

Public Poll