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दि राइजिंग न्यूज़

लखनऊ

 

AKTU कुलपति विनय कुमार पाठक की दबंगई और पहुंच के चर्चे एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। जब कुछ ईमानदार इसके मुखालिफ हुए तो कुलपति महोदय नेअपने रसूख के जरिए उन्हें ही अर्दब में ले लिया। इस बार इससे भी बात नहीं बनी तो कुलपति जी और दो पायदान नीचे उतर आए। अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर उन्होंने पुलिस व अपने कारिंदों के जरिए उनकी अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाने वाले के घर पर ही तोड़-फोड़ करवाई, धमकियां दी गईं। इसमें पुलिस भी पूरी तरह से शामिल रहीं। मामला कोर्ट पहुंचा तो तत्काल पीड़ित को मदद उपलब्ध कराने के आदेश हुए लेकिन वीसी से प्रभावित राजधानी की लखनऊ पुलिस आज तक सुरक्षा मुहैया नहीं करा पाई है।


दरअसल, लखनऊ तालकटोरा के मूल निवासी निवासी चंद्रेश कुमार ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के कुलपति के खिलाफ अदालत में एक याचिका दायर की। इसमें उन्होंने विनय कुमार पाठक के खिलाफ को-वारंटों (पद से हटाने) की मांग की। चंद्रेश के अनुसार, विनय कुमार पाठक फर्जी डिग्रियां और अनुभव दिखा कर पद पर बैठे हैं। ये इस पद की एक भी योग्यता पर खरे नहीं उतरते हैं। पैसा और रुतबा घर में भरा पड़ा है और जान-पहचान भी बहुत है।

बहुत पावरफुल हैं विनय पाठक

याचिका में कहा गया है कि विनय कुमार पाठक बहुत ही पावरफुल आदमी है।गलत को सही बनाने में पैसा पानी की तरह बहाते हैं ही लेकिन उससे भी ज्यादा उनकी पहुंच है। सियासी पहुंच के चलते उन्होंने कई षड्यंत्रों को अंजाम दिया। इसी के बलबूते कई फर्जीवाड़े को भी अंजाम दिया। इसी के साथ फर्जी अनुभव को दिखा कर कुलपति की कुर्सी तक पहुंच गए।

 

शिकायतकर्ता को रास्ते से हटाने की साजिश

पीड़ित शिकायतकर्ता चंद्रेश के मुताबिक गत 6 दिसंबर, 17 दिसंबर , 18 दिसंबर तथा 19 दिसंबर को सात से आठ लोग (जिसमे दो से तीन पुलिस वाले भी शामिल थे) उनके निवास पहुंचे थे लेकिन वह नहीं मिले। इत्तेफाक से इन लोगों को चंद्रेश के जीजा (रामजीत गौतम) मिल गए। उन्हीं को इन लोगों ने गाड़ी में बैठाया और अपनी हेकड़ी दिखाना शुरू कर दिया। साथ ही बंधक बना कर गाड़ी में लाद ले गए। अस्पताल भी ले जाया गया। बाद में उन्हेंबाजार खाला थाना में अकारण बैठा लिया गया। थाने के अन्दर पुलिस के सामने ही धमकाया गया। पीड़ित के मुताबिक उनके जीजा से कहा गया कि “अपने साले से बोल...केस वापस ले ले, ज्यादा उड़े नहीं...पर काटना हमें आता है। तुम लोगों की तरफ से कोई नहीं बोलेगा, हमारे पास पुलिस है...”।

एकेटीयू के कुछ अधिकारी संदेह के घेर में

मामले की सूचना पर पीड़ित अपने वकील को लेकर थाने पहुंचे। किसी तरह से उन लोगों ने रामजीत गौतम को इस चंगुल से छुड़ाया। पीड़ित के मुताबिक एकेटीयू के कुछ अधिकारी भी इस घटनाचक्र में  शामिल रहे हैं। हालांकि अभी पुख्ता सुबूत न होने के कारण उन्होंने कुलपति के अतिरिक्त किसी पर सीधे आरोप नहीं लगाया है।

 

रसूख में अब तक दर्ज नहीं हो सकी एफआइआर

20 दिसंबर को चंद्रेश ने इस बाबत थाने में एफआइआर दर्ज कराने हेतु प्रार्थना पत्र एसएसपी को दिया है। हालांकि पीड़ित को हर संभव मदद देने का दम भरने वाली यूपी पुलिस यहां कुलपति के रसूख के आगे बौनी नजर आ रही है। पुलिस इस पूरी रिपोर्ट पर गोलमोल कर बैठ गई। थानेदार से लेकर क्षेत्राधिकारी तक इसकी जानकारी से इंकार करते दिखाई दे रहे हैं।

कोर्ट ने एसएसपी को दिए निर्देश

पुलिस से मदद न मिलने से पीड़ित चंद्रेश ने इस संबंध में कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए अपनी पूरी आपबीती सुनाई। मामले को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने तुरंत लखनऊ एसएसपी को इस मामले को गंभीरता से लेने के निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने आर्डर जारी करते हुए कहा कि इसको तुरंत संज्ञान में लिया जाए और याची को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। फिलहाल पुलिस इस ओर से आंख मूंदे हुए हैं और अदालत का आदेश मिलने का इंतजार कर रही है। 

 

“कोर्ट के आदेश अभी तक मिला नहीं है, इसलिए इस बारे में कुछ कह नहीं सकते। आदेश मिलते ही कार्यवाही होगी।

राधे श्याम राय

क्षेत्राधिकारी एलआइयू            

कुलपति के कुछ नामचीन किस्से

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के विवादित कुलपति विनय पाठक के कारनामे भी विवादों से घिरे रहते हैं। सत्ताधारियों के करीबी बताकर सब पर रौब गांठने वाले विनय पाठक ने प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य ऐसे हाथों में सौंप दिया है जिस पर भ्रष्टाचार के दर्जनों मामले चल रहे हैं।गौरतलब है कि विनय पाठक पर भी फर्जी अनुभव दिखाने का आरोप है, इस मामले में कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने विनय पाठक को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। विनय पाठक पर अन्य आरोप भी लगते रहे हैं-

उत्तराखंड विवि में कार्यकाल के दौरान विनय पाठक पर चहेतों को नौकरी देने का आरोप लगा। जिन लोगों को पाठक ने उत्तराखंड में नौकरी दी उन्हीं लोगों को कोटा में भी पाठक ने अपने कार्यकाल में नियुक्त किया। अब इनमें से कई चेहरे एकेटीयू में भी दिखाई देते हैं। लिखित परीक्षा के नाम पर पारदर्शिता करने के ढोंग का आरोप भी विनय पाठक पर लग चुका है, इसकी लिखित शिकायत भी शासन और प्रधानमंत्री कार्यालय को की जा चुकी है।

पाठक पर आरोप है कि अनुभव में हेराफेरी करके इन्होंने कुलपति पद हासिल किया।

कुछ दिन पहले पाठक के खिलाफ सैकड़ों अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन कर नियुक्तियों में हेराफेरी का आरोप लगाया है।

आरके सिंह और आशीष मिश्र को नियमों की अनदेखी कर विनियमितीकरण करने का आरोप, शासन में जांच चल रही है।

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