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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

टैक्‍स कलेक्‍शन के लिए मोदी सरकार के प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है। दरअसल, वित्त सचिव एससी गर्ग ने यह स्वीकार किया है कि सरकार चालू वित्त वर्ष में इनडायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन का लक्ष्य संभवत: हासिल नहीं कर पाएगी। हालांकि, उन्‍होंने यह उम्‍मीद कि की सरकार डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन के लक्ष्य को समय से हासिल कर लेगी। गर्ग ने एक कार्यक्रम में कहा, “डायरेक्‍ट टैक्‍स के मोर्चे पर हम काफी हद तक आशान्वित हैं। हालांकि, इनडायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन लक्ष्य से कुछ कम रहेगा।” हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इनडायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन लक्ष्य से कितना कम रहेगा।

इसके साथ ही गर्ग ने यह भी कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद वित्त वर्ष 2018-19 के लिए रखे गए राजकोषीय घाटे के संशोधित 3.4 फीसदी के लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। उन्‍होंने कहा, “हम इसकी भरपाई बचत से कर लेंगे। ऐसे में 3.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सुरक्षित है।” सरकार ने अंतरिम बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.4 प्रतिशत रहने का रखा है जो पिछले बजट में रखे गये लक्ष्य की तुलना में 0.1 प्रतिशत अधिक है। 

 

इनडायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन का मुख्‍य आधार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी) है। लेकिन इस वित्त वर्ष में जीएसटी अब तक औसतन 95,000 करोड़ रुपये मासिक रहा है। वहीं साल के सिर्फ 3 महीनों में जीएसटी कलेक्‍शन लक्ष्य के मुताबिक 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर सका। जीएसटी कलेक्‍शन में कमी की मुख्‍य वजह स्‍लैब में कई बार कटौती और छूट सीमा बढ़ाए जाना है। जीएसटी के तहत रेवेन्‍यू कलेक्‍शन की बात करें तो फरवरी में पिछले साल के मुकाबले 13 फीसदी बढ़कर 97,247 करोड़ रुपये हो गया है। फरवरी, 2018 में जीएसटी राजस्व संग्रह 85,962 करोड़ रुपये था। इससे पहले जनवरी 2019 में जीएसटी कलेक्‍शन 1,02,503 करोड़ रुपये रहा। वहीं सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान डायरेक्‍ट टैक्‍स के 12 लाख करोड़ रुपये रहने का लक्ष्य तय किया है। इससे पहले इसके 11.50 लाख करोड़ रुपये रहने का बजट अनुमान रखा गया था।

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