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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

आरजीआइ (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) उन कारणों को सार्वजनिक नहीं करेगा, जिसकी वजह से असम के 40 लाख लोगों का नाम एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन) में शामिल नहीं हुआ है। सोमवार को एनआरसी का दूसरा ड्राफ्ट जारी किया गया। इसमें वहीं लोग शामिल नहीं हैं, जिन्हें कि भारतीय चुनाव आयोग ने संदिग्ध मतदाता माना है।

इन लोगों के और उनके वंशजों के मताधिकार खारिज हो चुके हैं। जिनके पास अभी बचे हुए हैं उन्हें किसी भी समय विदेशी घोषित किया जा सकता है। इन दो श्रेणियों के लोगों की संख्या 2.48 लाख है। उन्हें पहले से ही पता है कि उनके नाम एनआरसी ड्राफ्ट में तब तक शामिल नहीं होंगे जब तक कि ट्रिब्यूनल इसकी मंजूरी नहीं देता।

बताए गए ये तीन कारण

लगभग 1.5 लाख लोग जिनके नाम दिसंबर में प्रकाशित हुए ड्राफ्ट में शामिल हैं, लेकिन दूसरे ड्राफ्ट में उनका नाम नहीं है, उन्हें लेटर ऑफ इनफॉर्मेशन (एलओआइ) भेजा गया है। इस लेटर के जरिए उन्हें बताया गया है कि आखिर क्यों उनका नाम ड्राफ्ट में नहीं है? इन अभ्यर्थियों को तीन कारणों की वजह से बाहर किया गया है- उनका नाम गलती से शामिल हुआ था, उन्होंने झूठे दावे किए थे या फिर उनके द्वारा जमा करवाए गए पंचायत सर्टिफिकेट अवैध पाए गए हैं।

एलओआइ फाइनल ड्राफ्ट के प्रकाशित होने से सात दिन पहले अयोग्य आवेदकों को दिया जाएगा। एलओसी में लिखा जाएगा कि आवेदक के पास एनआरसी में अपना नाम जुड़वाने का दावा करने का एक और मौका है। इसमें अपना दावा जमा करवाने का समय और स्थल भी लिखना होगा। यह बात एनआरसी के स्टेट-कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने सुप्रीम कोर्ट को बताईं और इसकी इजाजत मांगी। जो उन्हें कोर्ट से मिल गई थी।

जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट में शामिल नहीं हैं उन्हें सात अगस्त से 28 सितंबर के बीच नए सिरे से स्थानीय रजिस्ट्रार के पास आवेदन करना होगा और इसके जरिए वह नाम शामिल ना होने का कारण जान सकते हैं। आरजीआइ शैलेष ने कहा, निजी जानकारी और नाम ना शामिल होने के कारण को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

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