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कर्नाटक: ठिठकी भाजपा, अब राज्यपाल के पाले में गेंद

Home | Last Updated : May 16, 2018 10:49 AM IST

Updates on Karnataka Elections and State Government


दि राइजिंग न्यूज़

बंगलुरु।

 

कर्नाटक विधानसभा के त्रिशंकु नतीजे आने के साथ ही सरकार बनाने के लिए सियासी नाटक शुरू हो गया। मंगलवार को घोषित नतीजे में बहुमत के जादुई आंकड़े से महज आठ सीट दूर ठिठक गई भाजपा को सरकार बनाने से रोकने के लिए कांग्रेस (78) ने जदएस (38) को बिना शर्त समर्थन का ऐलान कर दिया। वे राज्यपाल से मिलने भी पहुंच गए लेकिन, पूरे नतीजे आने तक उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया।

 

इस बीच, शाम 6 बजे भाजपा की ओर से येदियुरप्पा ने राज्यपाल से मिलकर सबसे बड़े दल (104 सीट) के नाते अपना दावा पेश किया। 15 मिनट बाद ही कांग्रेस-जदएस के नेता भी राज्यपाल से मिलने पहुंच गए।

222 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 112 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। किसी दल के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं होने के कारण गेंद अब राज्यपाल वजुभाई वाला के पाले में है। नतीजों में कांग्रेस को भारी झटका लगा है।

 

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपनी दो सीटों में से एक चामुंडेश्वरी पर 36 हजार वोटों से चुनाव हार गए, वहीं उनके दस मंत्रियों को भी शिकस्त का सामना करना पड़ा। सिद्धारमैया बादामी सीट से भी 1696 वोटों के मामूली अंदर से जीत पाए। स्थिति स्पष्ट होने के बाद सिद्धारमैया ने पद से इस्तीफा दे दिया।

बसपा का खाता खुला

जदएस के साथ गठबंधन के तहत 17 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली बसपा के एन महेश ने कोलेगल सीट से कांग्रेस के एआर कृष्णमूर्ति को 19,500 मतों से हराया।

 

भाजपा और कांग्रेस के विधायक दल की बैठक आज

भाजपा के विधायक दल की बैठक बुधवार को होगी, जिसमें येदियुरप्पा को विधायक दल का नेता चुनने की औपचारिकता को पूरा किया जाएगा। कांग्रेस के विधायक दल की बैठक भी बुधवार को होनी है।

भाजपा के सामने दोहरी चुनौती

भाजपा को अगले लोकसभा चुनाव में इस सूबे में जदएस-कांग्रेस की सामूहिक चुनौती से जूझना होगा। इस चुनाव में कांग्रेस और जदएस का संयुक्त वोट करीब 56 फीसदी है, जो भाजपा के वोट से करीब 20 फीसदी ज्यादा है। पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि यूपी में सपा-बसपा भी इसी प्रयोग को आजमा रही है। बीते लोकसभा चुनाव में विपक्ष में बिखराव के कारण ही भाजपा को महज 31 फीसदी वोटों के सहारे 283 सीटें हासिल हुई थी। जबकि वर्ष 1999 में 29 फीसदी वोट ला कर पार्टी को महज 182 सीटें ही मिली थी।

 

देवगौड़ा ने इसलिए थामा कांग्रेस का दामन

जदएस सूत्रों के मुताबिक देवगौड़ा ने गैर भाजपा सरकार की स्थिति में फिर से पीएम पद पाने की संभावना के अलावा राज्य में दलित और मुसलिम वोट बैंक के छिटकने के डर से भाजपा से दूरी बनाई। अगले ही साल लोकसभा चुनाव हैं। इसके अलावा उन्हें भाजपा से सीएम पद मिलने की उम्मीद नहीं थी।



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