Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्यूज़

श्रीनगर।

 

जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार टूटने के बाद राज्य में राज्यपाल शासन है। इसी बीच एक बार फिर राज्य में सरकार बनाने की कोशिशें तेज हुई हैं। सोमवार को राजधानी में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में कांग्रेस पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं संग इस मुद्दे पर चर्चा की। बैठक के बाद कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने कहा कि हमारी मांग है कि राज्य में जल्द से जल्द चुनाव हो। उन्होंने बताया कि हमनें राज्य के करीब 100 नेताओं को बैठक में बुलाया था। इसमें सांसद, विधायक, पूर्व सांसद-विधायक समेत कई लोग शामिल थे।

 

महबूबा मुफ़्ती दिल्ली में

दरअसल, जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती भी आज दिल्ली में ही हैं और इस प्रकार के कयास लगाए जा रहे हैं कि वह यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मिल सकती हैं। हालांकि, अंबिका सोनी ने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। आज हुई जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कांग्रेस के प्लानिंग ग्रुप की बैठक में मनमोहन सिंह, अंबिका सोनी के अलावा कर्ण सिंह, गुलाम नबी आज़ाद और पी चिदंबरम जैसे नेता शामिल हुए।

कांग्रेस और पीडीपी के खेमों में कन्फ्यूजन

दरअसल, कांग्रेस और पीडीपी दोनों खेमों में इस बात को लेकर आशंका है कि राज्य के बदलते माहौल और अमरनाथ यात्रा को लेकर चुनौती को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार राज्यपाल एन एन वोहरा की जगह किसी और को राज्यपाल नियुक्त कर सकती है। वहीं जम्मू-कश्मीर के भाजपा प्रभारी राम माधव की पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद गनी लोन और निर्दलीय विधायक इंजिनियर राशिद से पिछले दिनों हुई मुलाकात ने घाटी में राजनीतिक सुगबुगाहट को और हवा दे दी है। अनिश्चिताओं के बीच पीडीपी को डर ये भी है कि भाजपा उसके कुछ महत्वकांक्षी विधायकों को तोड़ सकती है।

 

ऐसा है राज्य का समीकरण

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं, वहीं सरकार बनाने के लिए 44 विधायकों की आवश्यकता होगी। पीडीपी के पास 28 विधायक हैं। अगर कांग्रेस और पीडीपी साथ आ जाते हैं तो उन्हें 4 और विधायकों की आवश्यकता होगी। तीन निर्दलीय विधायकों के अलावा एक विधायक सीपीआई-एम और एक विधायक जेकेपीडीएफ का है। आपको बता दें कि कांग्रेस को पीडीपी के साथ किसी भी तरह के गठबंधन के लिए घाटी में पीडीपी की धुर विरोधी नेशनल कांफ्रेस (एनसी) से अपना रिश्ता तोड़ना होगा या तो एनसी को अपने विश्वास में लेना होगा।

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