Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

साल 2019 में नरेंद्र मोदी की सत्ता धराशाई करने के लिए विपक्षी खेमे से दो फॉर्मूले अक्सर सामने आते हैं। इनमें एक महागठबंधन तो दूसरा तीसरा मोर्चा। मोदी के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी दल इन्हीं दोनों रणनीति के जरिए अपनी राजनीतिक बिसात बिछाने की कवायद में जुटे हैं। हालांकि इन सबके बीच विपक्ष के मुख्य सियासी किरदार दोनों फॉर्मूलों पर न भरोसा कायम कर पा रहे हैं और न ही एकमत नजर आते हैं।

 

महागठबंधन और तीसरे मोर्चे का बावल

विपक्षी खेमे से ही अक्सर महागठबंधन और तीसरे मोर्चे पर सवाल उठते दिख रहे हैं। ताजा बयान एनसीपी प्रमुख शरद पवार का है। पवार ने चुनाव पूर्व इन दोनों फॉर्मूलों को अव्यवहारिक बताया है। ऐसे में मोदी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता के लिए ये झटका माना जा रहा है।

इनको महागठबंधन पर भरोसा नहीं

पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने एक अंग्रेजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि तीसरा मोर्चा “व्यवहारिक” नहीं है और इसीलिए यह नहीं बन पाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके कई साथी चाहते हैं कि महागठबंधन बनाया जाए। पवार ने कहा, “मुझे खुद भी महागठबंधन पर बहुत भरोसा नहीं है। मैं निजी तौर पर महसूस कर रहा हूं कि साल 1977 जैसी परिस्थिति है।”

 

पवार का बयान ऐसे वक्त पर आया है जब जेडीएस प्रमुख एचडी देवगौड़ा ने तीसरा मोर्चे बनाने पर जोर दिया है। जबकि इससे पहले टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और तेलंगाना राष्ट्र समिति प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने मुलाकात कर तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद शुरू की थी। हालांकि, कांग्रेस तीसरे मोर्चे की बजाय महागठबंधन का फॉर्मूले को आगे बढ़ाना चाहती हैं क्योंकि ये उसके लिए फायदेमंद हो सकता है।

 

“बीजेपी को अकेले मात देना मुश्किल”

दरअसल विपक्षी दल इस बात से भी बखूबी वाकिफ हैं कि 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की कामयाबी के बाद लगातार हुए विधानसभा चुनावों में इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़ दें तो यह साफ है कि मौजूदा परिस्थिति में बीजेपी एक बड़ी राजनीतिक ताकत है और पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से उसका सामना नहीं किया जा सकता।

ऐसे में विपक्ष लंबे समय से नए राजनीतिक समीकरणों की तलाश कर रहा था। यूपी के उपचुनाव में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए सपा-बसपा ने सालों पुरानी दुश्मनी को भुलाकर हाथ मिलाया तो विपक्ष को जीत का फॉर्मूला मिला।

 

इसके बाद ही कर्नाटक में कांग्रेस ने जेडीएस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं किया लेकिन चुनाव परिणाम आने के साथ ही कांग्रेस ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए। जबकि बाद में सारे विपक्षी दलों ने इसमें शामिल होकर इस फॉर्मूले को आगे बढ़ाने में मदद की। इसी का नतीजा था कि कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण के दौरान विपक्ष के तकरीबन सभी पार्टियों के नेता शामिल हुए थे।

 

देवगौड़ा ने ये भी कहा कि विपक्षी पार्टियों के नेता मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे जो निश्चित तौर पर विपक्ष की एकजुटता को दर्शाता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ें।

विपक्ष में कशमकश

विपक्षी नेताओं की यह एकजुटता 2019 में होने वाले लोकसभा से पहले ही बिखरती दिख रही है। शरद पवार जहां संदेह जाहिर कर रहे हैं, तो वहीं देवगौड़ा के सुर भी कांग्रेस को चेतावनी दे रहे हैं। जबकि कांग्रेस नेता ही पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ जाने को तैयार नहीं है। इसके अलावा यूपी में सपा और बसपा भी कांग्रेस को लेकर कशमकश में हैं।

 

तेलंगाना में केसीआर राजी नहीं

तेलंगाना सीएम केसीआर बीजेपी को रोकने के लिए महागठबंधन के बजाए तीसरे मोर्चा की वकालत कर रहे हैं। दरअसल तेलंगाना में केसीआर का सीधा मुकाबला कांग्रेस से ही है। ऐसे में केसीआर गैर कांग्रेसी दलों को एकजुट करने की कवायद कर रहे हैं। कांग्रेस को छोड़कर बाकी विपक्षी दलों के नेताओं से केसीआर मुलाकात कर चुके हैं। इनमें खासकर उन नेताओं से मिले हैं, जिनका कांग्रेस के साथ जाने को लेकर संदेह बना हुआ है।

बंगाल में नहीं बन रही बात

ममता बनर्जी 2019 में तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद कर रही है। ममता ने वन-टू-वन का फार्मूला दिया था। कहा था कि जिस राज्य में जो पार्टी सबसे बड़ी है वो लीड करे बाकी दल उसे समर्थन करें। पिछले दिनों टीएमसी और कांग्रेस नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जंहा ममता के साथ जाने की रणनीति पर है तो वहीं पार्टी की राज्य ईकाई टीएमसी के साथ कतई जाने को तैयार नहीं हैं। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी लगातार कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव में उतरने की वकालत कर रहे हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस कशमकश में है कि वो लेफ्ट के साथ जाए या फिर टीएमसी के साथ।

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement

Loading...

Public Poll