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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

21 साल की लंबी लड़ाई के बाद बहुचर्चित सोनीपत बम ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला आया है। इस फैसले में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। साथ ही आदेश दिया गया कि अगर अर्थदंड नहीं भरा गया तो सजा एक साल के लिए बढ़ा दी जाएगी।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने सजा सुनाई। सोनीपत शहर में वर्ष 1996 में हुए सिलसिलेवार दो बम धमाकों के मामले में सोनीपत अदालत ने आतंकी टुंडा को सोमवार को 307 (हत्या का प्रयास), 120बी (षड्यंत्र रचना) व 3, 4 एक्सपलोजिव एक्ट (बम ब्लास्ट करना) के तहत दोषी करार दिया था।

 

कुछ ऐसा था उस दिन का मंज़र

 

सोनीपत में 28 दिसंबर 1996 को दो स्थानों पर बम ब्लास्ट हुए थे। उस दिन शाम 5:05 बजे पर पहला धमाका बस स्टैंड के पास स्थित बावा सिनेमा हाल में हुआ था। उसके महज दस मिनट बाद दूसरा धमाका गीता भवन चौक स्थित गुलशन मिष्ठान भंडार के बाहर हुआ था। धमाके में करीब एक दर्जन लोग घायल हुए थे। पुलिस ने इस संबंध में इंदिरा कॉलोनी निवासी सज्जन सिंह के बयान पर मामला दर्ज किया था।

सज्जन सिंह ने बताया था कि वह अपने साथी अनिल व विकास के साथ फिल्म देखने आया था। इस दौरान हुए धमाके में वह और 11 अन्य लोग घायल हुए थे। बाद में पुलिस ने इस संबंध में तीन आरोपियों उस समय गाजियाबाद व वर्तमान में जिला हापुड़ निवासी अब्दुल करीम टुंडा व उसके दो साथियों हापुड़ जिले के पिलखुआ निवासी शकील अहमद और दिल्ली के तेलीवाड़ा में अनार वाली गली निवासी मोहम्मद आमिर खान उर्फ कामरान को नामजद किया था।

 

पुलिस ने शकील और कामरान को वर्ष 1998 में गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन टुंडा घटना के बाद फरार हो गया था। शकील व कामरान को अदालत ने वर्ष 2002 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इसके बाद में अब्दुल करीम टुंडा को दिल्ली पुलिस ने अगस्त 2013 में नेपाल की सीमा से गिरफ्तार किया था। सोनीपत में चल रहे मामले में सभी 43 गवाही हुई और बहस कराई गई।

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