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क्रिमिनल मामलों का जल्‍द निपटारा करने के मूड में है सुप्रीम कोर्ट

Home | Last Updated : Feb 07, 2018 12:11 PM IST

Supreme Court is in The Mood of Solve the Criminal Cases in Courts


दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

आपराधिक अपील को जल्द निपटारे के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। यह कहना है सुप्रीम कोर्ट का। कोर्ट ने कहा कि सामान्य अपराधों का निपटारा एक तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए। न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि आपराधिक मामले दशकों तक लंबित नहीं रहने चाहिए क्योंकि इस वजह से आरोपी लंबे समय तक जेल में रहते हैं। लिहाजा ऐसे मामलों के जल्द निपटारे केलिए प्रभावी कदम उठाने की दरकार है।

 

दरअसल, पीठ ने पाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबसे पुराना लंबित आपराधिक अपील 46 वर्ष पुराना है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट में 1980 से लंबित पड़े आपराधिक मामलों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1994 से अब तक लंबित पड़े 70 हजार मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने दुख व्यक्त किया है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस विकट परिस्थिति बताते हुए कहा कि इस संबंध में कुछ करना ही होगा। इस मामले में वरिष्ठ वकील एमएन राव को अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया गया है।

मंगलवार को एमएन राव ने बताया कि वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए तंत्र विकसित नहीं है। उन्होंने कहा कि साल दर साल एक मामले की सुनवाई होती है। एक के बाद एक जज सुनवाई करते हैं। वे निपटारा नहीं करते। यह भी परेशानी है। इस पर पीठ ने कहा कि बात यह भी है कि एक वकील के बाद एक वकील बहस करते हैं। वे भी मामलों का निटपारे में दिलचस्पी नहीं लेते। वहीं पीठ के दूसरे सदस्य न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि वैसे अपराध जिनमें सात वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है, उनका निपटारा एक तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए।

 

ये टिप्पणी करते हुए पीठ ने लंबे समय से जेल में बंद दो आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपियों की ओर से पेश वकील दुष्यंत पराशर ने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल 16 वर्षों से जेल में है और इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर अपील के निपटारे का इंतजार कर रहे हैं।



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