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अयोध्या विवाद: SC में 8 फ़रवरी तक सुनवाई टली!

Home | Last Updated : Dec 05, 2017 03:52 PM IST

Supreme Court Hearing On Ayodhya Case of Uttar Pradesh


दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्ली।

 

बाबरी मस्जिद विध्वंस की 25वीं वर्षगांठ से ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व विवाद पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट में अब अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को होगी। सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने मामले की सुनवाई 2019 तक टालने तक कही है। वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सभी दस्तावेज पूरे करने की मांग की है।

 

क्या दलील दे रहे हैं वकील?

  • सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने मांग की है कि मामले की सुनवाई 5 या 7 जजों बेंच को 2019 के आम चुनाव के बाद करनी चाहिए। उन्होंने कहा है की ये मामला राजनीतिक हो चुका है। सिब्बल ने कहा कि रिकॉर्ड में दस्तावेज अधूरे हैं। कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने इसको लेकर आपत्ति जताते हुए सुनवाई का बहिष्कार करने की बात कही है।

  • कपिल सिब्बल ने कहा कि राम मंदिर एनडीए के एजेंडे में है, उनके घोषणा पत्र का हिस्सा है इसलिए 2019 के बाद ही इसको लेकर सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2019 जुलाई तक सुनवाई को टाला जाना चाहिए।

  • इसके जवाब में यूपी सरकार की ओर से पेश हो रहे तुषार मेहता ने कहा कि जब दस्तावेज सुन्नी वक्फ बोर्ड के ही हैं तो ट्रांसलेटेड कॉपी देने की जरूरत क्यों हैं? शीर्ष अदालत इस मामले में निर्णायक सुनवाई कर रही है। मामले की रोजाना सुनवाई पर भी फैसला होना है।

  • मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कहा कि अगर सोमवार से शुक्रवार भी मामले की सुनवाई होती है, तो भी मामले में एक साल लगेगा।

  • चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और पक्षकारों की दलीलों के मद्देनजर ये तय करेगी कि आखिर इस मुकदमे का निपटारा करने के लिए सुनवाई को कैसे पूरा किया जाए यानी हाईकोर्ट के फैसले के अलावा और कितने तकनीकी और कानूनी बिंदू हैं जिन पर कोर्ट को सुनवाई करनी है।

ये वकील रख रहे हैं पक्ष -

  • सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से - राजीव धवन, अनूप जॉर्ज चौधरी, कपिल सिब्बल

  • रामलला का पक्ष रखेंगे - सीएस वैद्यनाथन

  • यूपी सरकार की ओर से - तुषार मेहता, ASG

     

 

अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई हैं जहां अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर सबसे बड़ी सुनवाई शुरू हो रही है। विवादित जमीन पर हक की इस लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे अहम सात अलग-अलग भाषाओं के करीब 9000 पन्नों के दस्तावेज हैं। 11 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी, उर्दू, अरबी, फारसी, संस्कृत, पाली और पंजाबी भाषा के दस्तावेजों के अनुवाद के लिए 12 हफ्ते का वक्त दिया था।

 

सुनवाई शुरू करने से पहले कोर्ट को ये देखना पड़ेगा कि मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेजों के अनुवाद का काम पूरा हुआ है या नहीं। साथ ही ये बताया जा रहा है कि कुछ पक्ष तीन के बजाय पांच या फिर सात जजों की बेंच में सुनवाई की मांग कर सकते हैं। अगर कोर्ट इस मांग से सहमत नहीं होता है और ये पाता है कि दस्तावेजों के अनुवाद का खत्म हो चुका है तो ऐसे में अयोध्या भूमि विवाद की लगातार सुनवाई की आज से शुरुआत हो सकती है।

 

 

बता दें कि साल 2010 में हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को मामले से जुड़े तीन पक्षों निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर-बराबर बांटने का फैसला दिया था। इसी फैसले के खिलाफ सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। पिछले सात साल में कोर्ट में कुल 13 और याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं।

 

इस मामले में सुनवाई का क्रम क्या हो यानी किस पक्ष को पहले सुना जाए और किसे बाद में, इसका जवाब देते हुए अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिस पक्ष ने पहले अपील दाखिल की उसे पहले सुना जाएगा। इसी क्रम में सभी पक्षों को एक-एक करके सुना जाएगा। सुब्रमण्यम स्वामी और कुछ और पक्षों को मुख्य पक्षों के बाद सुना जाएगा।

 

 

इस मामले की सुनवाई को टाला नहीं जाएगा

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर अयोध्या जमीन केस की सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट पहले ही ये कह चुका है कि अब इस मामले की सुनवाई को और टाला नहीं जाएगा।



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