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बाबरी विध्वंस: लोग ऐसे बटोर रहे थे मलबे के पत्थर जैसे...

Home | 06-Dec-2017 10:55:47 | Posted by - Admin
   
Story of Babri Masjid Demolition

दि राइजिंग न्यूज़

अयोध्या।

आज से ठीक पच्चीस साल पहले अयोध्या में भारी तनाव के बीच बाबरी विध्वंस की तस्वीरें पूरी दुनिया देख रही थी। अयोध्या समेत पूरे फैजाबाद में कर्फ्यू लगा हुआ था। ऐसे में किसी को अंदाजा भी नहीं होगा कि देश और दुनिया को वो खबरें किस तरह से और कैसे मिल रही थीं।

 

आखिर भारी तनाव के बावजूद कैसे मीडियाकर्मियों को खबरों की जानकारी मिल पा रही थी। कैसे उन दिनों मशक्कत भरी जिंदगी में इन लोगों को खाने-पीने का सामान मुहैया हो पा रहा था।

उन दिनों में एक सफेद एंबेसडर कार इन मीडियाकर्मियों के लिए लाइफलाइन की तरह थी और अनंत कुमार कपूर नाम के एक शख्स उन लोगों के लिए सबसे बड़े मददगार थे। कर्फ्यू के दिनों में अनंत कुमार उस वक्त एक होटल चला रहे थे जो कि देश-विदेश के मीडियाकर्मियों से भरा हुआ था।

 

100 से ज्यादा पत्रकार उस होटल में ठहरे हुए थे

 

कपूर अब 71 साल के हैं और फैजाबाद जिले में शान-ए-अवध होटल के डायरेक्टर्स में से एक थे। कपूर देश-विदेश के पत्रकारों के लिए उस तनाव के वक्त में आस की किरण की तरह काम कर रहे थे, जो अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे की रिपोर्टिंग के लिए वहां मौजूद थे।

अयोध्या नगर निगम के ऑफिस के ठीक उल्टी तरफ शान-ए-अवध होटल मौजूद था। उस समय कपूर 46 साल के थे और होटल के ऑपरेशन्स को देख रहे थे। भारत और विदेश से आए हुए 100 से ज्यादा पत्रकार उस होटल में ठहरे हुए थे।

 

कपूर ने उस तनाव के वक्त को याद करते हुए बताया कि पूरा होटल सिर्फ पत्रकारों से भरा हुआ था। हमने उन लोगों के लिए अलग से व्यवस्था की थी जिन्हें कमरा नहीं मिल पाया था।

6 दिसंबर को बड़ी संख्या में “कार सेवक” अयोध्या में मौजूद थे

 

6 दिसंबर को बड़ी संख्या में “कार सेवक” अयोध्या में मौजूद थे और इन लोगों ने 16वीं शताब्दी की बाबरी मस्जिद को राम मंदिर की लहर में ढहा दिया। जिसके बाद दंगे होने लगे और अयोध्या में कर्फ्यू लगा दिया गया।

 

उन्होंने कहा कि व्हाइट एंबेसडर कार मेरे लिए लाइफलाइन की तरह थी, जिसके जरिए मैं होटल में रुके हुए लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों का सामान, खाने-पीने की चीजें खरीदता था। मुझे एंबेसडर से जरूरी सामानों को खरीदने के लिए फैजाबाद से बाहर के इलाकों में जाना पड़ता था।

कपूर ये भी कहते हैं कि कर्फ्यू को पूरे फैजाबाद में लागू कर दिया गया, जिसकी वजह से सारी टेलीफोन बूथ बंद कर दिए गए थे। वहां पर जितने भी पत्रकार मौजूद थे वो होटल में मौजूद एसटीडी लाइन्स का इस्तेमाल कर रहे थे। वो घंटों न्यूज स्टोरीज को ऑफिस तक भेजने के लिए फोन पर बात करते थे।

 

1 बजे ढहाया गया था विवादित ढांचा

 

अनंत कपूर उस वक्त को याद करते हुए ये भी कहते हैं कि होटल की सीढ़ियों के नीचे बने छोटे से कमरे को फोटोग्राफर्स ने डार्क रूम बना दिया था। जहां अयोध्या विवाद से जुड़ी हुई तस्वीरों को डेवलप करके शाम को दिनभर की फोटो अपने-अपने मीडिया हाउस को भेजते थे।

नवजीवन और कौमी आवाज के तत्कालीन पत्रकार कृपा शंकर पांडेय कहते हैं कि मैं विवादित ढांचे के गिराए जाने के 10 मिनट पहले तक वहां मौजूद था। मैं जहां खड़ा  था वहां से विवादित ढांचे की दूरी महज 50 मीटर थी। उसी वक्त तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने मुझसे कहा कि पांडेय जी यहां से हट जाइए।

 

पांडेय ने ये भी कहा कि मैं वहां सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मौजूद था। विवादित ढांचा दिन में करीब 1 बजे ढहाया गया। मैं ये देखकर हैरान था कि लोग मलबे के पत्थर ऐसे इकट्ठा कर रहे थे जैसे वो सोना हो।

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