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...और कौन-कौन हैं अखिलेश के पीछे

Home | 10-Jan-2017 11:49:59 AM
     
  
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  • अखिलेश यादव अब सचमुच बन चुके है मुलायम का नया अवतार
samajwadi party family issue

दि राइजिंग न्‍यूज ब्‍यूरो

कमल दुबे

10 जनवरी, लखनऊ।

यूपी की सियासी हवा में अब ये बातें तेजी से तैरने लगी हैं कि सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पीछे आखिरकार ऐसी कौन सी ताकतें है जिनके दम पर देश की राजनीति के बड़े महारथी पिता मुलायम सिंह यादव को बेबसी का रास्ते पर खड़ा कर दिया है। 

सपा कुनबे की करीब चार महीने पुरानी महाभारत की पूरी कहानी पर नजर डाले तो सीधे तौर पर तो राज्यसभा सदस्य प्रो. रामगोपाल यादव का नाम आता है लेकिन इसके अलावा भी कई अन्य दिमाग है जो अखिलेश यादव के पूरे सियासती खेल को पीछे काम कर रहे है।


डिम्पल की भी अहम भूमिका

सत्ता की ऊंगली पकड़ कर चलने वाले यादव परिवार नामों में प्रो. रामगोपाल यादव के बाद जो अन्य नाम आते है उसमे अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव का नाम मुख्य है। अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद से एक पत्नी के अलावा डिम्पल यादव अपने पति के राजनीतिक रथ में सारथी की भूमिका में रही है। हर अहम मौकों पर जहां डिम्पल ने अखिलेश का साथ दिया है वहीं अखिलेश यादव कोई भी बड़ा राजनीतिक फैसला करने से पहले पत्नी डिम्पल के साथ बात करते है।


ये हैं अन्‍य लोग

परिवार के इन दो नामों के अलावा नेताओं में किरणमय नंदा, रेवतीरमण सिंह, रामगोविन्द चौधरी, राजेन्द्र चौधरी, अहमद हसन अभिषेक मिश्र तथा अरविन्द सिंह गोप, नरेश अग्रवाल सुनील साजन के नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा राजनीति के दंगल में कुछ नौकरशाह भी हाथ आजमा रहे हैं।

जिसमें सबसे पहले नाम मुख्यसचिव रहे आलोक रंजन का नाम है। बताते है कि रंजन इन दिनों अखिलेश यादव के सबसे विश्वासपात्र सलाहकारों में है। इसके अलावा नवीन चन्द्र वाजपेई नवनीत सहगल पार्थसारथी सेन भी सपा के इस महासंग्राम में अखिलेश यादव के साथ खड़े है।


बहुतों ने बदला पाला 

सपा कुनबे के दंगल का पार्ट-टू शुरू होने के पहले तक अखिलेश यादव के साथ युवा टीम के कुछ गिने-चुने नेता और अधिकारी ही नजर आते थे लेकिन तस्वीर पूरी तरह बदली है। पार्टी के जो नेता और और नौकरशाह कल तक मुलायम सिंह यादव के साथ खड़े थे उनमें से अधिकतर ने पाला बदल लिया है। बदले हालात में ये अब अखिलेश यादव के साथ खड़े है। 

जानकारों का कहना है कि पूरी सरकार में मुलायम सिंह यादव की सबसे करीबी समझी जाने वाली अनीता सिंह ने समय की नजाकत को समझते हुए पाला बदल लिया है। विदित हो कि अखिलेश यादव ने जब शिवपाल सिंह यादव सहित कई दिग्गजों का मंत्रिमंडल से हटाया था तो तभी उन्‍होंने निर्देश दिए थे कि कोई भी अधिकारी किसी भी तरह का पत्रावली या आदेश उनकी अनुमति के बिना नहीं करेगा। 

यह रोक मुख्यरूप से मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव का काम देख रही अनीता सिंह को लेकर था। मुलायम सिंह यादव का बेहत करीबी होने के कारण मुख्यमंत्री को आशंका थी कि इस लड़ाई में कही अनीता सिंह कोई ऐसा आदेश न करे दें जिससे उन्हें दिक्कत हो। बताते हैं कि अनीता सिंह ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर पूरी तरह उनके प्रति वफादारी का वादा किया है।


मुलायम का नया अवतार  

अगर सपा के दंगल पार्ट-टू को देखे तो अखिलेश यादव सचमुच पिता मुलायम का नया अवतार बनकर उभर चुके हैं। उनकी टीम में अनेक ऐसे नेता शामिल हो चुके हैं जो कभी मुलायम के वफादार हुआ करते थे। जानकारों बताते है कि मुलायम सिंह यादव ने भी अपने राजनीतिक कैरियर में तमाम दिग्गजों को अखिलेश यादव की तरह धूल चटाई है। 

चाहे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की मौत के बाद उनकी राजनीतिक विरासत की बात हो या फिर अभी हाल में बिहार के महागठबंधन से ऐन वक्त पर पीछे हटने का ताजा मामला। यह अलग बात है कि इस बार उन्हें उनके अपने ही बेटा धूल चटाने में सफल रहा है।



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