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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

आरबीआइ (भारतीय रिजर्व बैंक) ने तीन दिन तक विचार-विमर्श करने के बाद बुधवार को आरबीआइ ने रेपो रेट में बढ़ोतरी कर दी है। मौद्रिक नीति समिति ने इसमें 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट छह फीसदी से बढ़कर 6.25%. फीसदी हो गया है।

मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में यह पहली बार है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में RBI ने ये फैसला किया है। रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के सभी सदस्यों ने 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी के पक्ष में फैसला दिया।

ईएमआइ पर भी बढ़ सकता है ब्‍याज का बोझ

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद आम आदमी के लिए बैंकों से कर्ज लेना महंगा हो सकता है। इसके साथ ही ईएमआइ पर ब्याज का बोझ देखने को मिल सकता है।

इसके साथ ही मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही में सीपीआइ महंगाई के 4.8 से 4.9 के बीच रहने की संभावना जताई है। वहीं, दूसरी छमाही में इसके लिए 4.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।

रेपो रेट के साथ ही आरबीआइ ने रिवर्स रेपो रेट को छह फीसदी कर दिया गया है। मौद्रिक नीति समिति के सभी सदस्यों ने रेपो रेट में बढ़ोतरी करने के पक्ष में वोट किया।

रिजर्व बैंक ने कहा कि अप्रैल से सितंबर के बीच महंगाई 4.8 फीसदी से 4.9 फीसदी रहने का अनुमान है। अक्टूबर से मार्च के बीच महंगाई घटकर 4.7 फीसदी रह सकती है। महंगाई पर होम रेंट अलाउंस का असर होगा।

अफोर्डेबल होम लोन की सीमा बढ़ी

रिजर्व बैंक ने वित्तवर्ष 2019 के लिए विकास दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। विकास दर अप्रैल से सितंबर के बीच 7.5 फीसदी से 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है।

आरबीआइ ने अपनी कर्ज नीति का ऐलान करते हुए अफोर्डेबल होम लोन की सीमा भी बढ़ा दी है। अब महानगर में होम लोन की सीमा 28-35 लाख कर दी गई है। वहीं, मेट्रो शहर में होम लोन 20 से बढ़ाकर 25 लाख कर दिया गया है।

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