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एक साथ चुनाव पर असहमत राजेताओं ने गिनाए अलग-अलग मतदान के फायदे

Home | 05-Oct-2017 16:35:40 | Posted by - Admin
   
Reaction of Politicians over Elections of Lok Sabha and Rajya Sabha

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

सितंबर 2018 के बाद देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव करवाने संबंधी चुनाव आयुक्त ओ पी रावत के बयान के बाद चारों ओर इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। मीडिया ने भी देश में एक साथ चुनावों पर कुछ राजनेताओं की प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की।

हम स्वागत करते हैं, लेकिन ये इतना आसान नहीं

 

एक साथ चुनाव के मुद्दे पर बीजेपी नेता जीवीएल नरसिमन ने कहा, "हम एक देश एक चुनाव के पक्षधर हमेशा रहे हैं। क्योंकि इससे चुनाव में खर्च कम होता है और उसमें पारदर्शिता आएगी। पूरे साल देश में किसी ना किसी राज्य में चुनाव चलता रहता है। इससे काम करने में तेजी बनी रहेगी।"

 

उन्होंने आगे कहा, "चुनाव आयोग ने अच्छा बयान दिया है कि एक देश एक चुनाव की दिशा में सितंबर 2018 तक तैयरियां पूरी कर ली जाएंगी। अब सभी दलों को मिलकर इस पर फैसला करना है। संसदीय समिति में इस पर चर्चा हुई है। इस पर चुनाव आयोग अगर सभी दलों के साथ चर्चा करते हैं तो हम उसका स्वागत करते हैं।"

नरसिमन ने कहा कि फिलहाल सरकार की तरफ से इस पर अभी कोई चर्चा की कोई संभावना नहीं है।  ये फैसला लेना इतना आसान नहीं इसलिए सभी दलों का इस पर राजी होना मुश्किल है। क्योंकि अभी कई राज्यों में हाल ही में चुनाव संपन्न हुए हैं।

 

मोदी सरकार का होगा वाजपेयी सरकार वाला हाल

 

कांग्रेसी नेता सुरजेवाला से जब चुनाव आयोग की बात पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि जब चुनाव हो। फ्री और फेयर इलेक्शन हो।  चुनाव कब होगा इसका अधिकार चुनी सरकार का है, मोदी जी ने जरूर चुनाव आयोग को कुछ संदेश दिया होगा लेकिन इसकी जानकारी कांग्रेस पार्टी को नहीं है लेकिन हम मोदी सरकार के खिलाफ चुनाव के मैदान में लड़ने के लिए तैयार हैं। मोदी सरकार का भी वही हाल होगा जो वाजपेयी सरकार का जल्द चुनाव कराने पर हुआ था।"

बार-बार चुनाव के लोकतंत्र में हैं कई फायदे

 

मीडिया ने जब पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ एस वाई कुरैशी से बात की तो उन्होंने कहा, "चुनाव साथ करना अच्छा तो है पर चुनौतियां कम नहीं हैं। इसके लिए दोगुना मशीनें चाहिए। 32 लाख साल भर में।  अभी 16 लाख मिल जाएं वही उपलब्धि होगी। ईवीएम के साथ अब तो वीवीपैट भी चाहिए।"

एक साथ चुनाव पर आगे बोलते हुए उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग तो एक साथ चुनाव कर भी दे तो विधानसभा मध्यावधि में भंग हो जाए तो? इसकी संविधान में भी उचित व्यवस्था हो। तब कैसे काम चलेगा? बार-बार चुनाव कई बार लोकतंत्र के लिए भी अच्छा होता है। सरकारों पर नैतिक दबाव होता है।  जनप्रतिनिधियों की शक्ल जनता देख पाती है। बार-बार चुनाव लोकतंत्र में कई फायदे भी करता है जैसे रोजगार। फिलहाल तो आयोग की इस घोषणा के बाद logistic और संवैधानिक चुनौतियां बरकरार हैं। "

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