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सस्ते कर्ज के लिए करना होगा अभी और इंतजार

Home | 06-Dec-2017 11:55:12 | Posted by - Admin
   
RBI Monetary Policy Meeting live Updates

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में एक बार फिर कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि इस बार भी आम लोगों का सस्ते कर्ज के लिए इंतजार खत्म नहीं हुआ है।

 

आरबीआइ ने रेपो रेट को 6 फीसदी पर बरकरार रखा है। इसके बाद सस्ते कर्ज के लिए आम आदमी को फरवरी तक इंतजार करना पड़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में भी आरबीआइ की मौद्रिक समिति ने रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की थी। अक्टूबर में भी इसे  6 फीसदी ही रखा गया था।

एमपीसी की तरफ से रेपो रेट में कटौती न किए जाने के लिए महंगाई को जिम्मेदार बताया गया है। एमपीसीस ने कहा है कि महंगाई को 4 फीसदी के दायरे में बांधे रखने के लिए और ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए यह फैसला लिया है। इसी वजह से नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला लिया गया है।

 

हालांकि फरवरी में भी आरबीआइ की मौद्रिक नीति समिति अर्थव्यवस्था की चाल देखकर ही फैसला लेगी। आज आरबीआइ के सामने रेपो रेट में कटौती करने के फैसले को लेकर कई चुनौतियां भी हैं।

कम हुआ है दबाव

 

मौद्रिक नीति समिति की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब जीडीपी के आंकड़ों में सुधार देखने को मिला है। इससे अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार आया है। इस सुधार को देखते हुए आरबीआइ पर ब्याज दरें कम करने का दबाव जरूर कम हुआ है। हालांकि जीडीपी आंकड़ों के अलावा बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की लगातार बढ़ रही कीमतों की चुनौती भी उसके सामने रहेगी।

बढ़ी है महंगाई

 

थोक महंगाई दर और खुदरा महंगाई दर में इजाफा हुआ है। नवंबर में जारी किए गए अक्टूबर की थोक महंगाई दर के आंकड़ों को देखें तो यह बढ़कर 3.56 फीसदी के स्तैर पर आ गई है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई  दर भी 3.58 फीसदी के स्तइर पर पहुंच गई है। महंगाई बढ़ने के लिए खाद्य उत्पादों की लगातार बढ़ रही कीमतें हैं। इस बैठक में आरबीआइ के पास बढ़ती महंगाई एक बड़ी चुनौती रहेगी।

तेल की कीमतों में इजाफा

 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। मौजूदा समय में कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। इस वजह से ब्याज दरें घटाने और बढ़ाने को लेकर फैसला लेते वक्त आरबीआइ की समिति इस पर भी विचार करेगी। समिति के फैसले को धार देने में यह फैक्टर भी अहम भूमिका निभाएगा। पिछले कुछ महीनों के दौरान निजी क्षेत्र का निवेश घटा है। इस पर भी आरबीआइ की मौद्रिक समिति विचार-विमर्श करेगी और इसके बाद ही कोई  फैसला लेगी।

जीडीपी का ये मिल सकता है फायदा

 

जीडीपी के आंकड़ों में सुधार आने का फायदा ग्रोथ प्रोजेक्शन में सुधार के तौर पर मिल सकता है। जीडीपी में आई तेजी को देखते हुए आरबीआइ अर्थव्यवस्था के ग्रोथ अनुमान को बेहतर कर सकता है।

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