Akshay Kumar and Priyadarshan Donated to Save Flood Affected People in Kerala

दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

असम में एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को राजनीति न करने की नसीहत दी। उन्‍होंने राज्यसभा में कहा कि एनआरसी मामले पर सरकार के किसी भी नेता को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है, यह शर्मनाक है। उन्होंने कहा की जानकारी लेना सही है कि असम में कितने देशी हैं और कितने विदेशी, इस मामले पर कुछ लोग लगातार दिक्कत पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और भेदभाव पैदा कर रहे हैं।

 

भारी हंगामे के बीच गृहमंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल को भी घेरा और कहा कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया 1985 में शुरू हुई, जब राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री थे। इसे अपडेट करने का फैसला 2005 में मनमोहन सिंह जी ने लिया था।

उन्होंने फिर दोहराया कि यह फाइनल लिस्ट नहीं है इसलिए एनआरसी पर स्थिति साफ होने का इंतजार करना चाहिए। एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया 15 अगस्त 1985 को शुरू हुई थी।

 

पूरी तरह से निष्‍पक्ष है रिपोर्ट

राजनाथ सिंह ने कहा कि रिपोर्ट पूरी तरह से निष्पक्ष है। जिनके नाम रजिस्टर में नहीं है उनके सामने कई विकल्प आज भी मौजूद हैं। गृह मंत्री ने इस दौरान विपक्ष को इस मामले में सरकार का हाथ होने की बात साबित करने की बात दोहराई। सिंह इससे पहले यह बातें लोकसभा में भी कह चुके हैं और विपक्ष को चुनौती भी दे चुके हैं।

 

अंतिम नहीं है एनआरसी की सूची

गृह मंत्री ने कहा कि सभी जानते हैं कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ है। यह ड्राफ्ट सूची है, अंतिम सूची नहीं। कुछ लोग अनावश्यक रूप से भय का माहौल पैदा कर रहे हैं। जिनका नाम रजिस्टर में दर्ज नहीं है उन्हें अभी कई स्तर पर अपनी नागरिकता साबित करने के विकल्प हैं। ऐसे लोग न्यायाधिकरण में जा सकते हैं। जिनका नाम सूची में नहीं है उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

 

शोर-शराबे के कारण लोकसभा की कार्यवाही हुई बाधित

एनआरसी के मुद्दे पर असम गए अपने सांसदों को हवाईअड्डे पर रोके जाने के विषय को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने आज लोकसभा में काफी शोरशराबा किया जिसके कारण प्रश्नकाल के दौरान सदन की बैठक 15 मिनट के लिए स्थगित भी करनी पड़ी।

 

सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने पार्टी के कुछ सांसदों को असम के सिलचर हवाई अड्डे पर रोके जाने का मुद्दा उठाया और कहा कि इसको लेकर उनकी तरफ से विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है और लोकसभा अध्यक्ष इस पर संज्ञान लें।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि वे इस मामले को प्रश्नकाल के बाद उठाएं।

 

टीएमसी सदस्‍यों ने की नारेबाजी

इसके बाद तृणमूल के सदस्य अध्यक्ष के आसन के निकट आकर नारेबाजी करने लगे। इस दौरान आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग कर रहे तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य भी हाथों में तख्तियां लिए हुए आसन के निकट पहुंच गए।

सुमित्रा महाजन ने शोर-शराबे के बीच प्रश्नकाल को आगे बढ़ाया। उन्होंने तृणमूल सदस्यों ने अपने स्थान पर जाने को कहा, लेकिन हंगामा नहीं थमता देख उन्होंने सदन की बैठक करीब 15 मिनट के लिए दोपहर 11:50 बजे तक स्थगित कर दी। तृणमूल के सदस्यों ने “केंद्र सरकार जवाब दो”, “प्रधानमंत्री डर गए” और “वंदे मातरम” के नारे लगाए।

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