Bhojpuri Film Balamua Tohre Khatir Will Release on 31 August

दि राइजिंग न्यूज़

भोपाल।

 

मध्यप्रदेश में भाजपा के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को नए सिरे से सरकारी बंगला आवंटित कराने को लेकर सियायत गर्मा गई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस से राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा है कि वो पूर्व मुख्यमंत्रियों को दोबारा बंगला आवंटित किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रही है। उत्तर प्रदेश में जब राजनाथ सिंह, अखिलेश यादव और मायावती ने बंगला खाली कर दिया है तो मध्य प्रदेश में इस नियम का पालन क्यों नहीं हो रहा है? पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगला खाली कराकर दोबारा उन्हें क्यों आवंटित कर दिया गया? 

 

बता दें कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद पिछले सप्ताह ही चार पूर्व मुख्यमंत्रियों कैलाश जोशी, उमा भारती, बाबूलाल गौर और दिग्विजय सिंह के बंगलों का आवंटन निरस्त कर दिया था। हालांकि दिग्विजय सिंह को छोड़कर बाकी के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को वही बंगले शुक्रवार को सशुल्क आवंटित कर दिए गए।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बंगला आवंटित नहीं किया गया है, क्योंकि उन्होंने अभी तक सरकार को कोई आवेदन नहीं दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दोबारा सरकारी बंगले के लिए आवेदन करने की सलाह दी है। हालांकि उन्होंने बंगला लेने के इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वो एक महीने के अंदर वर्तमान बंगला भी खाली कर देंगे।

 

सूत्रों की मानें तो पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 23 मई को ही बंगले के लिए आवेदन किया है, लेकिन उन्हें अभी बंगला आवंटित नहीं किया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बंगला आवंटन में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि सिंधिया ने जब 2 महीने पहले ही बंगले के लिए आवेदन किया है तो उन्हें अभी तक बंगला क्यों नहीं आवंटित किया गया?

इन्हें मिले हैं दो-दो बंगले

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत कई नेताओं को दो-दो सरकारी बंगले आवंटित किए गए हैं, जिसमें एक दिल्ली में है और एक भोपाल में। चूंकि सुषमा स्वराज विदिशा से सांसद हैं, इसलिए उन्हें भोपाल में बंगला आवंटित किया गया है। लेकिन सवाल ये है कि उन्हें यहां बंगले की क्या जरूरत, क्योंकि इस बंगले में रहना तो दूर, उनका भोपाल आना-जाना भी बहुत कम ही होता है। इसके अलावा उमा भारती, नरेंद्र सिंह तोमर, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, आलोक संजर और प्रभात झा को भी दिल्ली से लेकर भोपाल तक दो-दो बंगले मिले हैं।

 

बंगलों के रखरखाव पर हर साल 50 करोड़ रुपये खर्च

राज्य में पूर्व मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और विधायकों को बी और सी श्रेणी के बंगले आवंटित किए गए हैं, जो एक एकड़ से ज्यादा भूभाग में फैले हुए हैं। इनमें बी श्रेणी के कुल 105 बंगले हैं, जिनका किराया 6 हजार रुपये प्रतिमाह है। जबकि सी श्रेणी के कुल 61 बंगले हैं, जिनका किराया 4,800 रुपये प्रतिमाह है। इन सभी बंगलों के रखरखाव पर हर साल सरकार के 50 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 

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