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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

रोजगार के मुद्दे पर मोदी सरकार को लगातार विपक्ष की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। जिसका जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पिछले एक साल में ही एक करोड़ से ज्‍यादा रोजगार दिए गए, इसलिए इस तरह का दुष्प्रचार निश्चित रूप से बंद होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने समाचार एजेंसी एएनआइ को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेजी से विकास कर रहा है तो फिर ये कैसे कहा जा सकता है कि रोजगार के मोर्चे पर कुछ भी नहीं हो रहा है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर दिए अपने भाषण को दोहराते हुए पीएम मोदी ने सवाल किया कि देश में निवेश बढ़ रहा है, सड़क निर्माण, रेल लाइन बिछाने का काम, सोलर पार्क बनाने और ट्रांसमिशन लाइन के विस्तार का काम तेजी से हो रहा है, तो फिर कैसे कहा जा सकता है कि नये रोजगार नहीं मिलेंगे?

एक साल में एक करोड़ लोगों को रोजगार

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफओ) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 45 लाख नये खाते खोले गये हैं और पिछले नौ माह के दौरान 5.68 लाख लोग नई पेंशन स्कीम से जुड़े हैं। इससे पता चलता है कि पिछले साल में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले हैं। पीएम ने कहा कि रोजगार को लेकर चलाया जा रहा दुष्प्रचार अब बंद होना चाहिए। लोगों को अब इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला नहीं है।

मोबाइल निर्माण के दो उपक्रम बढ़कर हुए 120

देश में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के क्षेत्र में होने वाले विकास की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 में मोबाइल निर्माण के दो उपक्रम थे, जो अब बढ़कर 120 हो गए हैं। पीएम ने सवाल किया जिस तरह का विकास इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में देखने को मिला है तो क्या नौकरियों का सृजन नहीं हुआ होगा? उन्होनें कहा कि आज भारत स्टार्ट अप्स का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है। लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, मोबाइल एप आधारित एग्रीगेटर्स की आज भरमार है तो क्या ये नए रोजगार का सृजन नहीं कर रहे हैं?

प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यटन का क्षेत्र भी बड़े रोजगार के अवसर पैदा करता है। पिछले वर्ष पर्यटकों की संख्या में 14 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है, तो क्या इससे नये रोजगार नहीं पैदा हुए होंगे?

भीड़ हिंसा एक अपराध है, चाहे उसका उद्देश्य कुछ भी हो

पीएम मोदी से जब पूछा गया कि आप अतीत में गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा की निंदा करते रहे हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं। भीड़ हिंसा की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में अल्पसंख्यक और पिछड़े समुदाय को आप अपने सबका साथ, सबका विकास के साथ कैसे जोड़ पाएंगे?

इसके जवाब में उन्होंने कहा, यह बहुत दु:ख की बात है कि हमें इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनना पड़ता है। यदि देश में ऐसा एक मामला भी होता है तो यह दुखद है और इसकी कड़े शब्दों में निंदा किए जाने की जरूरत है। हमारी सरकार कानून का राज स्थापित करने और जीवन की सुरक्षा और हर नागरिक की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है।

उन्होंने आगे कहा, इस मुद्दे पर बिलकुल भी संदेह नहीं होना चाहिए। इस मुद्दे पर हमारी सरकार ने राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए हुए हैं। मैं यह बात साफ कर देना चाहता हूं कि मॉब लिंचिंग एक अपराध है, बेशक इसका उद्देश्य कुछ भी हो। कोई भी शख्स किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता है और हिंसा नहीं कर सकता है।

राज्य सरकारों को भीड़ की हिंसा पर लगाम कसने के लिए प्रभावी उपाय करने चाहिए और अपने नागरिकों की रक्षा करनी चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से क्यों ना आते हों।

बनाई एक उच्‍च स्‍तरीय समिति

नरेंद्र मोदी ने कहा, मुझे अपेक्षा है कि सभी सरकार और बड़े स्तर पर लोग, सरकार के अंग और राजनीतिक दलों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस घृणित कार्य से लड़ें। इस मुद्दे पर नई सिफारिशें देने के लिए सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। इसके अलावा, सरकार ने गृह मंत्री के नेतृत्व में मंत्रियों का एक समूह भी बनाया है, जो उच्च स्तरीय समितियों की सिफारिशों पर गौर करेगा।

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