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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

शनिवार को भारत से कुल 14 समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद आज फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों राष्ट्रपति भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (इंटरनेशनल सोलर अलायंस समिट) सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया।

इस सोलर अलायंस में 121 देशों का जुड़ना संभावित है। मैक्रों के उद्भाटन भाषण के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई। समिट का उद्देश्य यहां शिरकत करने वाले देशों को सस्ती, स्वच्छ और और नवीकरणीय ऊर्जा मुहैया कराना है।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस का नन्हा पौधा आप सभी के सम्मिलित प्रयास और प्रतिबद्धता के बिना रोपा ही नहीं जा सकता था। इसलिए मैं फ्रांस का और आप सबका बहुत आभारी हूं। 121 सम्भावित देशों में से 61 इस अलायंस से जुड़ चुके हैं और 32 देशों ने रूपरेखा समझौते पर सहमति जता दी है।

 

 

उन्‍होंने कहा, भारत में वेदों ने हजारों साल पहले से सूर्य को विश्व की आत्मा माना है। भारत में सूर्य को पूरे जीवन का पोषक माना गया है। आज जब हम जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का रास्ता देख रहे हैं, तो प्राचीन दर्शन के संतुलन और समग्र दृष्टिकोण की ओर देखना होगा। हमारा हरित भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम साथ मिलकर क्या कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में शामिल विश्व नेताओं के सामने ये भी बताया कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्‍होंने कहा, हम 2022 तक इससे 175 गीगा वाट बिजली उत्पन्न करेंगे जिसमें से 100 गीगा वाट बिजली सौर से होगी।

 

 

नवोन्मेष के प्रोत्साहन पर बल

नवोन्मेष को प्रोत्साहन देने का बल देते मोदी ने कहा- हमें नवोन्मेष को प्रोत्साहित करना होगा ताकि विभिन्न आवश्यकताओं के लिए सौर समाधान प्रदान हो सके। हमें सौर पॅोजेक्ट्स के लिए रियायती वित्तपोषण और कम जोखिम का वित्त मुहैया कराना होगा। नियामक पहलुओं एवं मानकों का विकास करना होगा जो सौर समाधान अपनाने और उनके विकास को गति दें। विकासशील देशों में बैंक योग्य सौर परियोजनाएं के लिए परामर्श समर्थन का विकास करना होगा। हमारे प्रयासों में अधिक समावेशिता और भागीदारी पर बल दिया जाये।

उत्‍कृष्‍टता केंद्र का नेटवर्क बनाने पर दिया भी बल

उत्कृष्टता केंद्र का नेटवर्क बनाने को लेकर पीएम ने कहा- हमें उत्कृष्टता के केंद्र का एक व्यापक नेटवर्क बनाना चाहिए। हमारी सौर ऊर्जा नीति को विकास की समग्रता से देखें, ताकि एसडीजी की प्राप्ती में इससे ज्यादा से ज्यादा योगदान मिले। हमे आईएसए सचिवालय को मजबूत और प्रोफेशनल बनाना चाहिए। पूरी मानवता की भलाई चाहते हैं तो मुझे विश्वास है कि निजी दायरों से बाहर निकलकर एक परिवार की तरह हम उद्देश्यों और प्रयासों में एकता और एकजुटता ला सकेंगे। यह वही रास्ता है जिससे हम प्राचीन मुनियों की प्रार्थना- "तमसो मा ज्यातिर्गमय" को चरितार्थ कर पायेंगे।

2015 में हुआ था गठन

इससे पहले 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने पेरिस में आईएसए का गठन किया था। जिसके बाद 2016 में ओलांद ने ही इस अलायंस के हेडक्वार्टर की नींव गुड़गांव में रखी थी।

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