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मुरथल केस में खुलासा: आंदोलन के दौरान हुए नौ गैंगरेप

Home | 13-Oct-2017 11:25:15
  • सीबीआइ जांच की मांग
Nine Cases Of GangRape in Murthal During Jat Reservation Movement

दि राइजिंग न्‍यूज

चंडीगढ़।

 

मुरथल केस मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा एमिकस क्यूरी बनाए गए सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने बड़ा खुलासा करते हुए हाईकोर्ट को बताया है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 22 और 23 फरवरी 2016 की रात को मुरथल में नौ गैंगरेप हुए थे।

गुप्ता ने कोर्ट को बताया है कि प्रकाश सिंह जांच आयोग के सदस्य और तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस अधिकारी विजय वर्धन में उन्हें बताया था कि मुरथल में कम से कम नौ गैंगरेप हुए थे।

 

 

एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर मुरथल गैंगरेप मामले की जानकारी देने के लिए विजय वर्धन को गाली देने और बेइज्जत करने का आरोप लगाया था। गुप्ता ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुरथल में हुए गैंगरेप मामलों की जांच सीबीआइ को सौंपने की मांग की है।

 

सुनवाई के दौरान अनुपम गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि दंगों की जांच के लिए गठित एसआइटी के सदस्य आईएएस विजय वर्धन को गैंगरेप की जानकारी हरियाणा के पूर्व डीजीपी केपी सिंह ने दी थी, लेकिन विजय वर्धन ने कोर्ट में इस जानकारी के होने से इनकार कर दिया था। इससे साबित होता है कि वह किसी न किसी दबाव में काम कर रहे थे।

गुप्ता ने कोर्ट को बताया है कि मुरथल गैंगरेप मामले को लेकर हरियाणा सरकार का रुख नकारात्मक है और सरकार यह साबित करने में लगी हुई है कि मुरथल में कोई दुष्कर्म हुआ ही नहीं।

 

 

हरियाणा पुलिस के मुताबिक मुरथल गैंगरेप मामले में अभी तक कोई पीड़ित सामने नहीं आया है ऐसे में जांच आगे नहीं बढ़ रही है। गुप्ता ने सुखदेव ढाबा के मालिक अमरीक सिंह का उदाहरण देते हुए बताया कि उसे घटना की पूरी जानकारी थी, लेकिन उसने  जांच कर रहे एसआइटी के सदस्यों को कुछ भी नहीं बताया।

 

अनुपम ने कोर्ट को बताया है कि एक ओर जहां राज्य सरकार मुरथल गैंगरेप मामले की जांच सीबीआइ से करवाने का विरोध कर रही है, वहीं दूसरी और जाट आंदोलन के दौरान आग के हवाले किए गए सरकार के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर और मुनक नहर में की गई तोड़फोड़ के मामलों की जांच सीबीआइ के हवाले कर चुकी है।

 

 

अनुपम ने हाईकोर्ट को बताया है कि मुरथल गैंगरेप मामले सहित जाट आंदोलन के दौरान कुल 1212 एफआइआर दर्ज की गई थी, लेकिन इनमें से सि‍र्फ 921 मामलों की अंतरिम रिपोर्ट तैयार की गई है, 184 मामलों में रिपोर्ट तैयार ही नहीं है। पुलिस केवल 172 लोगों को गिरफ्तार कर पाई थी और अब तक सिर्फ 81 मामलों में चालान पेश किया गया है 1105 मामलों को अनअटेंडेड श्रेणी में रखा गया है।

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