Akshay Kumar and Priyadarshan Donated to Save Flood Affected People in Kerala

दि राइजिंग न्यूज़

गुवाहाटी।

 

असम में एनआरसी ने अपनी फाइनल लिस्ट जारी कर दी है। इसमें 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिकता नहीं मिली है। वहीं दो करोड़ 89 लाख लोगों को राज्य में भारतीय नगरिक माना गया है। एनआरसी के स्टेट को-आर्डिनेटर प्रतीत हजेला ने यह जानकारी दी है।  

 

एनआरसी का दूसरा ड्राफ्ट जारी

बता दें कि असम में वैध नागरिकों की पहचान के लिए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) ने यह दूसरा ड्राफ्ट जारी किया है। इसे लेकर राज्य में पहले से ही अल्पसंख्यकों में भय और असमंजस का माहौल था। वहीं असम की सीमा से लगे चार राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय और मणिपुर) ने घुसपैठ की आशंका के मद्देनजर सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई थी समय सीमा

लगभग तीन साल से एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी थी। पहले इसका प्रकाशन 30 जून को होना था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए इसकी समयसीमा एक महीने बढ़ा दी थी। एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हलेजा ने बताया कि मसौदा राज्य के सभी एनआरसी सेवा केंद्रों पर प्रकाशित कर दिया गया है। आवेदक सूची में अपना नाम, पता और फोटो देख सकते हैं। साथ ही एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया है। जिसपर फोन करके भी पता लगाया जा सकता है, कि उन्हें भारतीय नागरिकता मिली है या नहीं। 

 

गृह मंत्री और मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

वहीं इससे पहले राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भरोसा दिया है कि वैध रूप से भारत में आने वाले लोगों को कोई दिक्कत नहीं होगी और उन्हें बाद में विदेशी न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी नागरिकता साबित करने का मौका मिलेगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने साफ किया है कि 30 जुलाई को महज मसविदा प्रकाशित होगा। बाद के दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम एनआरसी का प्रकाशन होगा। फिर भी अल्पसंख्यकों का भय खत्म नहीं हो रहा है। 

अर्धसैनिक बलों की 220 कंपनियां भेजी

असम में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने भी असम और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की 220 कंपनियां भेजी हैं। घुसपैठ रोकने के लिए सीमाओं पर केंद्रीय बलों के अलावा इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की जा रही हैं।

 

क्या है एनआरसी?

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में जिनके नाम नहीं होंगे उन्हें अवैध नागरिक माना जाएगा। इसमें उन भारतीय नागरिकों के नामों को शामिल किया जा रहा है जो 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे हैं। उसके बाद राज्य में पहुंचने वालों को बांग्लादेश वापस भेज दिया जाएगा। 

मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध

कई राजनीतिक दल और मुस्लिम संगठन एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार अल्पसंख्यकों को बाहर निकालने के लिए इसका सहारा ले रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसकी निगरानी में एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है। इससे पहले 31 दिसंबर 2017 को जारी पहली सूची में 3.29 करोड़ आवेदकों में 1.9 करोड़ लोगों के नाम ही शामिल थे।

 

नगालैंड भी एनआरसी अपडेट करने का कर रहा विचार

असम के बाद अब एक अन्य पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड भी एनआरसी को अपडेट करने पर विचार कर रहा है। हालांकि पहले वह असम में चल रही पूरी प्रक्रिया का अवलोकन कर लेना चाहता है। दूसरी ओर, नगा छात्र संघ (एनएसएफ) ने भी 31 जुलाई से बाहरी लोगों के कागजात की जांच का एलान किया है।

मेघालय ने बढ़ाई निगरानी

मेघालय ने भी असम से लगी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। खासी छात्र संघ (केएसयू) ने राज्य की साझा सरकार को ठोस घुसपैठ रोधी कदम उठाने को कहा है। केएसयू का कहना है कि वर्ष 1971 के बाद असम में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के कारण असमिया, बोड़ो और राभा जैसी जनजातियां अपने घर में ही बेगानी हो गई हैं।

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