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कर्नाटक चुनाव: कांग्रेस के लिए अस्तित्व लेकिन भाजपा के लिए 2019 की लड़ाई

Home | Last Updated : May 11, 2018 10:47 AM IST

Motive of Congress and BJP in Karnataka Vidhan Sabha Chunav 2018


दि राइजिंग न्यूज़

बंगलुरु।

 

कर्नाटक विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। बता दें कि कर्नाटक में 12 मई को वोट पड़ेंगे। भाजपा यदि कांग्रेस को हरा देती है तो “कांग्रेस मुक्त भारत” का सपना काफी हद तक पूरा हो जाएगा। वहीं यदि कांग्रेस सत्ता बरकरार रखती है तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ी कामयाबी होगी। गौरतलब है कि प्रचार के दौरान कांग्रेस की रणनीति यह थी कि चुनाव को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुकाबला बनाया जाए, वहीं भाजपा की कोशिश इस जंग को मोदी बनाम राहुल बनाने की रही।

शाह की रणनीति लेकिन मोदी के कंधों पर ज़िम्मा

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बंगलूरू में छह बेडरूम के बंगले में तंबू गाडे़ हुए हैं और पिछले तीन महीने से लगातार पार्टी की जीत के लिए रणनीति बना रहे हैं लेकिन राज्य में पार्टी की जीत का सारा दारोमदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंधे पर ही है। दक्षिण के इस राज्य में पार्टी की जीत के लिए उन्होंने कम से कम 21 रैलियां की हैं। वह लगातार अपनी रैलियों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सिद्धारमैया पर जोरदार हमला कर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं।

 

हालांकि मोदी और शाह की रैलियों की सबसे बड़ी खामी यह है कि वे हिंदी में भाषण दे रहे हैं जिससे मतदाता खासकर ग्रामीण उनसे ज्यादा जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रहे हैं। मोदी अपनी रैलियों में महादयी नदी समेत स्थानीय मुद्दों की जगह केंद्रीय मामलों और केंद्र सरकार की नीतियों का बखान कर रहे हैं।

ग्रामीणों से जुड़ने में सिद्धारमैया हो रहे सफल

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी यह वन मैन शो साबित हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पिछले तीन महीने से राज्य में आ रहे हैं। इस दौरान वह विभिन्न मठों, मंदिरों, चर्च और गुरुद्वारों में भी गए लेकिन उनका मतदाताओं के बीच उतना क्रेज देखने को नहीं मिल रहा है जितना मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का है।

 

कांग्रेस का चुनाव प्रचार एक तरह से सिद्धारमैया पर टिका हुआ है। यही नहीं वह प्रधानमंत्री मोदी को भी रैलियों के साथ ही सोशल मीडिया पर जवाब दे रहे हैं। सिद्धारमैया कन्नड़ में भाषण देकर स्थानीय जनता खासकर ग्रामीणों को पार्टी से जोड़ने में सफल हो रहे हैं। सिद्धारमैया अपनी रैलियों में स्थानीय मुद्दों को उठाकर लोगों का ज्यादा ध्यान खींच रहे हैं।

किंगमेकर बन सकती है जद-एस

वहीं राज्य की तीसरी ताकत जद-एस की बात करें तो एचडी कुमारस्वामी पार्टी की तरफ से प्रमुख प्रचारक हैं। बीमार चल रहे देवगौड़ा ने कुछ ही रैलियां की हैं। पार्टी का जोर वोक्कालिगा बहुल्य सीटों पर ज्यादा है। चुनाव विश्लेषक जद-एस को ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं लेकिन त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में पार्टी किंगमेकर बन सकती है। इसी को देखते हुए पीएम मोदी जद-एस पर तीखे हमले नहीं कर रहे हैं। एक रैली में तो उन्होंने खुलकर देवगौड़ा की प्रशंसा भी की थी।



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