Salman Khan father Salim Khan Support MeToo Campaign in Bollywood

दि राइजिंग न्यूज

फोटो- अभय वर्मा

लखनऊ।

 

शायर निदा फाजली की बहुत मशहूर लाइनें हैं, बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां, याद आती है चौका, बासन, चिमटा फुंकनी जैसी मां। मानवीय जीवन में मां और उसकी संतान के बीच के रिश्ते की व्याख्या इतनी बेहतर कम ही देखने को मिलती है। रविवार 13 मई यानी मदर्स डे अथवा मातृ दिवस। बढ़ते स्वार्थ और उपभोक्तावाद ने तमाम रिश्तों में खटास पैदा की है, लेकिन आज भी मां और उसके बच्चे के बीच का रिश्ता पहले की तरह से अटूट है।

(फोटो- अभय वर्मा)

(फोटो- अभय वर्मा)

चाहे वह गोमतीनगर विस्तार में एक बहुमंजिला इमारत में रेत-गारा ढोने वाली लक्ष्मी हो या फिर डालीगंज पुल पर गमछों की छांव में बच्चों को बैठाकर सब्जी बेचने वाली रुखसाना। चिलचिलाती धूप में कड़ी मशक्कत के बाद भी ध्यान केवल अपने अबोध बच्चों का। केवल मानव नहीं, मां और संतान का रिश्ता तो जानवरों के बीच भी गहरा होता है। मशहूर शायर मुनव्वर राणा की लाइनें हैं, ऐ अंधेरे देख ले तेरा मुंह काला हो गया, मां ने आंख खोल दी उजाला हो गया।

(फोटो- अभय वर्मा)

(फोटो- अभय वर्मा)

सेंटीमेंट का कारोबार

मां और उसकी संतान के बीच एक पावन और अटूट रिश्ता, लेकिन उपभोक्तावादी युग में अब यह भी कारोबार बन गया है। दरअसल इसी सेंटीमेंट का फायदा उठाने के लिए बाजार भी तैयार हैं। ज्वैलरी से लेकर वस्त्रों का बाजार सज गया है। मदर्स डे स्पेशल आफरों की धूम है और लोगों को रिझाने का प्रयास हो रहा है। बाजारों में सेल और आकर्षक छूट चल रही है और केवल इस रिश्ते के भरोसे ही कारोबार चमकाने का प्रयास चल रहा है।

(फोटो- अभय वर्मा)

(फोटो- अभय वर्मा)

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement