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नई दिल्ली।

भारत में इस साल मॉनसून की बारिश सामान्य रह सकती है। इससे कृषि पैदावार अच्छी होगी और देश की अर्थव्यवस्था को गति को मजबूत आधार मिलेगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने यह जानकारी दी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन ने कहा कि दीर्घकालिक अवधि में मॉनसून की बारिश का औसत 96 फीसदी रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग 96 फीसदी से 104 फीसदी के बीच हुई बारिश को औसत या सामान्य मानसून के रूप में परिभाषित करता है। 2017 और 2018 में, क्रमशः 95 फीसदी और 91 फीसदी बारिश हुई थी। आईएमडी ने अपने अनुमान में कहा है, “कुल मिलाकर 2019 के मॉनसून सीजन के दौरान देश में मॉनसून की वर्षा का वितरण काफी अच्छा रहेगा, जिससे खरीफ के सीजन में किसानों को फायदा होगा।”

अच्छी होगी पैदावार

सामान्य मॉनसून से खरीफ सीजन में फसल अच्छी होगी और पैदावार अच्छी होने से ग्रामीण इलाके में लोगों की आय बढ़ेगी और उपभोक्ता वस्तुओं पर खर्च बढ़ेगा। यदि मॉनसून की वजह से पैदावार अच्छी हुई तो आगे भी महंगाई नियंत्रण में रहेगी। महंगाई के लगातार नरम रहने से रिजर्व बैंक पर इस बात के लिए दबाव बढ़ेगा कि ब्याज दरों में कटौती की जाए। रिजर्व बैंक अपने मौद्रिक नीति की अगली समीक्षा लोकसभा चुनाव के बाद 6 जून को करने वाला है। हालांकि, इसका एक नुकसान यह है कि अच्छी पैदावार होने से फसलों की कीमत कम रहेगी और इससे किसानों के लिए कुछ मुश्किल बढ़ सकती है। लगातार पांच महीने तक गिरावट के सिलसिले के बाद देश में खाद्य वस्तुओं की खुदरा दर में 0.30 फीसदी की बढ़त हुई है।

 

आर्थिक तरक्की को बल मिलेगा

मॉनसून की बारिश अच्छी होने से चावल, मक्का, गन्ना, कपास और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन अच्छा होगा। इससे अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से है, लेकिन दिसंबर की तिमाही में ग्रोथ सिर्फ 6.6 फीसदी हुई है और यह पिछले पांच तिमाहियों में सबसे कम है।

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