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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले साल नोटबंदी के एलान के बाद कालेधन को सफेद करने के गोरखधंधे के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चल रही सघन मुहीम में कई राजनीतिज्ञों और अफसरशाहों के नाम उजागर हुए हैं।

 

पिछले साल दिसंबर से शुरु हुई इस मुहीम में इस गोरखधंधे के विदेशों तक फैले गहरे गैरकानूनी तंत्र का पर्दाफाश हुआ है। ईडी के डोजियर में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमों मायावती, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद मीसा यादव, खनन उद्यमी और तमिलनाडु की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले शेखर रेड्डी समेत दर्जनों नेताओं के पैसे के संदिग्ध लेन-देन का ब्यौरा है। इन नेताओं के साथ दो दर्जन से अधिक अफसरशाह और निजी व्यक्तियों के खिलाफ जांच तेजी से चल रही है।

 

ईडी डोजियर के मुताबिक काले धन को सफेद करने के 4000 ठोस मामले सामने आए हैं। ईडी ने नवंबर 2016 से सितंबर 2017 के बीच इन सभी मामलों में फेमा और पीएमएलए के तहत केस दर्ज किया है।

 

ईडी ने अबतक की 800 रेड

ईडी के मुताबिक एजेंसी को अबतक 11000 करोड़ रुपए के हेरफेर का सुबूत मिला है। इस मुहिम में ईडी ने अबतक 800 रेड की हैं जिनमें देश और विदेशों के मनी ट्रांस्फर चैनल के सुराग मिले हैं। ईडी ने इस सिलसिले में अबतक 54 लोगों को गिरफ्तार किया है जबकि करीब 600 कंपनियों से उनके धंधे का ब्यौरा मांगा गया है।

 

ईडी के उच्चपदस्थ सूत्रों ने एक न्‍यूज पोर्टल को बताया कि इस गोरखधंधे में संयुक्त अरब अमीरात, दुबई, मलेशिया और हांगकांग जैसे कई देशों के मनी चैनल का इस्तेमाल किया गया है।

 

ईडी ने अन्य सरकारी एजेंसियों की मदद से इन देशों को धन की आवाजाही की जानकारी देने के लिए अनुरोध पत्र (लेटर रोगेटरी) भेजा है। डोजियर के मुताबिक नोटबंदी के तुरंत बाद कालेधन के सफेद करने का बड़ा तंत्र सक्रिय हो गया। स्टॉक मार्केट, खनन व्यापार, शेल कंपनी और सहकारी संस्थानों का जम कर इस्तेमाल किया गया।

सूत्रों के मुताबिक इसमें बैंकिंग चैनल का भी इस्तेमाल हुआ है जिसकी जांच चल रही है। साथ ही नोटबंदी के बाद विदेशी मुद्रा विनिमय की पड़ताल भी की जा रही है।

 

सूत्रों ने बताया कि डोजियर में आए जितने नाम हैं सबको अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिलेगा। ईडी मौजूद सुबूतों के आधार पर अपना पक्ष मजबूत कर रही है। केंद्र सरकार के काले धन के खिलाफ इसे बड़ी मुहीम माना जा रहा है।

 

सीबीआइ ने भी दर्ज की 77 एफआइआर

उधर सीबीआइ ने भी नोटबंदी के बाद काले धन की हेराफेरी के मामले में अबतक 77 एफआइआर दर्ज की हैं। इनमें 180 सरकारी कर्मचारियों समेत 307 लोगों के खिलाफ जांच चल रही है। ईडी सीबीआइ के इन केसों से जुड़े फेरा और फेमा संबंधी अपराधों की अलग से जांच करेगा।

 

यही वजह है कि विपक्षी दलों ने नोटबंदी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्हें मालूम है कि सरकार की विभिन्न एजेंसियां काले धन के खिलाफ काम कर रही है। इसलिए विपक्ष का शोर मचाना स्वभाविक है। उन्हें मालूम है कि आज नहीं तो कल सच सामने आ जाएगा।

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