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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

असम में रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) का दूसरा और आखिरी ड्राफ्ट पेश कर दिया गया है। इसके तहत 2 करोड़ 89 लाख 83 हजार 677 लोगों को वैध नागरिक मान लिया गया है। इस तरह से करीब 40 लाख लोग अवैध पाए गए हैं। ड्राफ्ट के आते ही सियासत तेज हो गई है।

 

टीएमसी ने जहां असम में NRC ड्राफ्ट के मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। वहीं टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि NRC के नाम पर बंगाली लोगों को टारगेट किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने असम एनआरसी पर कहा कि कई लोगों के पास आधार कार्ड और पासपोर्ट होने के बावजूद उनका नाम ड्राफ्ट में नहीं है। सही दस्तावेजों के बावजूद लोगों को ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया। उन्हें सरनेम की वजह से बाहर किया गया है। क्या बीजेपी सरकार जबरदस्ती लोगों को बाहर निकालना चाहती है?

ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार बंगाली लोगों को निशाना बना रही है और वोट बैंक की राजनीति कर रही है। ममता ने चिंता जताते हुए कहा कि 40 लाख लोग जिन्हें ड्राफ्ट से बाहर किया गया है, वो कहां जाएंगे? अगर बांग्लादेश भी उन्हें वापस नहीं लेता तो उनका क्या होगा?

 

ममता ने कहा कि असम से हमारे राज्य की सीमा लगी हुआ है। NRC में जिन लोगों के नाम नहीं आए हैं, इसका मतलब क्या वे भारतीय नहीं है। उत्तर बंगाल के लोगों को बताया जा रहा है कि वे गैर भारतीय हैं। बंगालियों को टारगिट किया जा रहा है। ममता ने चेतावनी देते हुए कहा कि याद रखें कि वे रोहिंग्या नहीं हैं।

NRC के ड्राफ्ट में अवैध ठहराए गए लोगों को बंगाल में शरण दिए जाने के सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा, ये समस्या हमारे पास आती है, तो हम राजनीतिक रूप से केंद्र सरकार की तरह व्यवहार नहीं करेंगे। हम इंसान हैं, उन्हें सुरक्षा देना हमारा कर्तव्य हैं। हम उन्हें वापस नहीं भेज सकते। हमें अपने नागरिकों को क्यों बाहर देना चाहिए। उनमें ज्यादातर लोग भारतीय नागरिक हैं। अब वे केंद्र सरकार के कारण शरणार्थी बन गए हैं।

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