Shahrukha Khan Son Abram Reaction on Zero Trailer

दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में अपनी बात रखी। यहां उन्होंने प्राचीन भारत के इतिहास, दर्शन और राजनीतिक पहलुओं का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक और सरदार पटेल समेत कई अन्य नेताओं के विचारों को याद किया।

आइए जानते हैं राष्ट्र और राष्ट्रवाद पर क्या बोले प्रणब मुखर्जी-

  • राष्ट्र, राष्ट्रीयता और राष्ट्रभक्ति को समझने के लिए हम यहां हैं, मैं भारत के बारे में बात करने आया हूं। देश के प्रति निष्ठा ही देशभक्ति है।

  • देशभक्ति में देश के सभी लोगों का योगदान है, देशभक्ति का मतलब देश के प्रति आस्था से है।

  • सबने कहा है हिन्दू एक उदार धर्म है, ह्वेनसांग और फाह्यान ने भी हिंदू धर्म की बात की है।

  • उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद सार्वभौमिक दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम्, सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” से निकला है।

  • भारत दुनिया का सबसे पहला राष्ट्र है, भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हैं।

  • भारतीय राष्ट्रवाद में एक वैश्विक भावना रही है, हम विवधता का सम्मान का करते हैं।

  • हम एकता की ताकत को समझते हैं, हम अलग अलग सभ्यताओं को खुद में समाहित करते रहे हैं।

  • राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान है और सहिष्णुता हमारी सबसे बड़ी पहचान है।

  • देश पर कई बार आक्रमण हुए लेकिन 5000 साल पुरानी हमारी संस्कृति फिर भी बनी रही।

  • 1800 साल तक भारत दुनिया के ज्ञान का केंद्र रहा है। दार्शनिकों ने भी भारत की बात की है।

  • भेदभाव और नफरत से भारत की पहचान को खतरा है। नेहरू ने कहा था कि सबका साथ जरूरी है।

  • तिलक ने कहा था कि “स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।” तिलक ने कहा था कि स्वराज में धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं होगा।

  • राष्ट्रवाद किसी धर्म, भाषा या जाति से बंधा हुआ नहीं है, संविधान में आस्था ही असली राष्ट्रवाद है।

  • हमारा लोकतंत्र उपहार नहीं है बल्कि लंबे संघर्ष का परिणाम है।

  • सहनशीलता ही हमारे समाज का आधार है। सबने मिलकर देश को उन्नत बनाया है।

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