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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

जेट एयरवेज में आर्थिक संकट की खबर आ रही है। कहा जा रहा है कि जेट ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि उसके पास एयरलाइंस को 60 दिन से ज्यादा चलाने का पैसा नहीं है। जिस वजह से कंपनी बड़े पैमाने पर कॉस्ट कटिंग की तैयारी में है। लोगों को लग रहा है कि कहीं इस कंपनी की हालत भी किंगरफिशर जैसी तो नहीं हो जाएगी।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बाबत जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल और मैनेजमेंट की टीम ने कर्मचारियों के साथ बैठक की है, उन्हें आर्थिक हालात के बारे में जानकारी दी गई। कंपनी लागत कम करने के लिए अपने पायलटों एवं अन्य स्टाफ को उनकी सैलरी घटाने की बात कही है। कंपनी ने कर्मचारियों से कहा कि अगर वे नहीं चाहते हैं कि कंपनी बंद हो और उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़े तो सैलरी कम करवाने पर राजी हो जाएं।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जेट एयरवेज ने पायलटों को अगले दो वर्षों तक 15 फीसदी कम सैलरी पर काम करने की सलाह दी है। कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि अगर पायलट सैलरी घटाने पर सहमत हो गए तो किसी भी पायलट को निकाला नहीं जाएगा। हालांकि पायलटों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, उनकी यूनियन ने मैनेजमेंट को वित्तीय संकट से बाहर निकलने में मदद करने की सलाह दी है।

 

जेट एयरवेज के पायलटों की यूनियन नेशनल एविएटर्स गिल्ड (एनएजी) ने आज कहा कि वह एयरलाइन को परिचालन लागत कम करने में पूरा सहयोग कर रही है। लेकिन पायलटों ने एयरलाइन के वेतन कटौती प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी है। बढ़ती ईंधन लागत और घटते किरायों के बीच एयरलाइन वित्तीय संकट का सामना कर रही है। सूत्रों ने बताया कि लागत कटौती प्रयासों के तहत पूर्ण सेवा विमानन कंपनी ने पायलटों सहित अपने सभी कर्मचारियों से वेतन में भारी कटौती पर सहमत होने को कहा था। वेतन में कटौती की चिंता तथा नौकरियों के संभावित नुकसान के परिप्रेक्ष्य में एयरलाइन ने शुक्रवार को कहा कि वह एक लागत दक्ष ढांचे पर काम कर रही है।

एनएजी ने अपने सदस्यों को भेजे पत्र में कहा, “हम अपनी कंपनी का सहयोग करने का प्रयास कर रहे हैं, इसके लिए हम प्रबंधन से मिलेंगे। इसके पीछे मकसद लागत दक्षता के लिए समाधान ढूंढना और अपनी सेवाओं का मापदंड ऊंचा करना है।” यूनियन के सदस्यों की संख्या 1,100 से अधिक है। यूनियन का कहना है कि बोइंग 737 मैक्स विमानों को शामिल करने से लागत दक्षता हासिल करने में मदद मिलेगी और सेवाओं का स्तर बेहतर किया जा सकेगा।

 

आर्थिक संकट से उबरने के लिए जेट एयरवेज ने वर्किंग कैपिटल लोन के लिए आवदेन दिया, लेकिन बैंकों ने उसके सामने कड़ी शर्त रख दी। बैंकों का कहना है कि जेट एयरवेज पर पहले से ही 8,150 करोड़ रुपये का कर्ज है। इन बैंकों में कई ने विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइन को भी लोन दिया था।

इस बीच जेट एयरवेज ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए गए स्पष्टीकरण में 60 दिन तक के ही संचालन क्षमता की बात को खारिज कर दिया। साथ ही जेट एयरवेज ने कंपनी की खस्ता हालत को लेकर मीडिया में आईं खबरों को खारिज किया है। कंपनी ने ट्वीट कर कहा कि मीडिया में कंपनी को लेकर आई खबरें गलत और दुर्भावनापूर्ण हैं। कंपनी ने हिस्सेदारी की बिक्री से संबंधित किसी के साथ बातचीत से भी इनकार किया है।

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